उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव और मायावती के कार्यकाल के कथित घोटालों की जांच कराने जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों के लिए योगी सरकार का यह फैसला नई मुसीबतें खड़ी कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी सरकारों में पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) में एक हजार करोड़ से रुपए से भी ज्यादा के घोटाले होने का आरोप लगा है। न्यूज-18 के मुताबिक शासन की तरफ से विशेष जांच टीम (एसआईटी) को पड़ताल का जिम्मा सौंपा गया है।
जेल से अस्पताल तक के निर्माण में घोटाले का आरोपः रिपोर्ट के मुताबिक एसआईटी को वित्त वर्ष 2004-05 से 2012-13 के बीच पूर्वांचल के 13 जिलों की 137 परियोजनाओं में हुए घोटाले की जांच का पत्र मिला है। इसके बाद एसआईटी ने पीडब्लूडी के चीफ सेक्रेटरी से संबंधित फाइलें मांगी है। घोटालों के ये मामले जेल, अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कम्युनिटी सेंटर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। काम के एवज में कम पैसे का भुगतान किए जाने के मामले भी सामने आए हैं।
एसआईटी के रडार पर हैं इन जिलों के कामः विशेष जांच टीम की जिन जिलों पर नजर रहेगी उनमें मिर्जापुर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, सोनभद्र, चंदौली, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर और श्रावस्ती शामिल बताए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2019 में लंबे समय बाद मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों ने आरएलडी के साथ गठबंधन कर बीजेपी को चुनौती दी थी। हालांकि यह गठबंधन सीटों के लिहाज से सपा को फायदा नहीं दिला पाया, वहीं बसपा शून्य से बढ़कर 10 सीटों तक पहुंच गई।

