उमा मिश्रा
द्वारका की दो महिलाएं सुनीता और अंशु पाठक झुग्गी-बस्ती में रहने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती हैं। वे इन बच्चों को अच्छे और बुरे के बीच का अंतर भी समझाती हैं। इन बच्चों में से कुछ कभी भीख मांगते थे जो आज एक बेहतर जिंदगी पाने की आशा में पढ़ाई कर रहे हैं। सुनीता 15 सालों से झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। उनके साथ इस समय 850 जरूरतमंद बच्चों की फौज तैयार हो चुकी है। इन्हेंं वे फुटपाथ पर या फिर किसी पार्क में हर रोज एक घंटा पढ़ाती हैं। उन बच्चों में से ही एक लड़की है सविता। सविता अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करती थीं। उन्होंने बताया कि वह 15 साल पहले सुनीता से जुड़ीं। उसके माता-पिता अपनी बेटी का पढ़ाना चाहते थे लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे उसे स्कूल नहीं भेज सके। सुनीता के समझाने पर उन्होंने सविता को पढ़ने के लिए भेजा।
आज सविता राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं। सविता का कहना है कि वह पीएचडी कर प्रोफेसर बनना चाहती हैं। मजदूर माता-पिता की कमाई अधिक नहीं है, इसलिए सुनीता ही सविता की पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रही हैं। सुनीता ने द्वारका सेक्टर-7 से इस मुहिम की शुरुआत की थी। इस वक्त वह द्वारका सेक्टर-11 मेट्रो के पास बसी झुग्गियों में अपनी कक्षा लगाती हैं।
अंशु पाठक दो साल से इस कार्य में जुटी हुई हैं। उन्होंने पढ़ाने की शुरुआत जून 2016 में रेड लाइट पर भीख मांगने और कूड़ा बीनने वाले बच्चों से की थी। अभी वह द्वारका सेक्टर-3 की झुग्गियों में रहने वाले करीब 60 बच्चों को पढ़ा रही हैं। अंशु लड़कियों को शिक्षित करने पर ज्यादा ध्यान देती हैं। उनका कहना है कि जागरूकता न होने के कारण परिवार में बच्चों की संख्या बढ़ती चली जाती है। इस कारण बड़ी बहन पर अन्य भाई-बहनों को संभालने का बोझ आ जाता है। फिर इन बच्चियों को पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ जाती है। सुनीता और अंशु दोनों ही बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल में उनका दाखिला भी करवाती हैं। उनके खाने पीने के साथ-साथ उनके पहनने के लिए भी समय-समय पर मदद करती रहती हैं। अंशु दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में अध्यापक हैं।
कबड्डी टीम बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की तैयारी: सुनीता ने झुग्गी के बच्चों की दो कबड्डी टीम बनाई हैं। इसमें दो आयु वर्ग के 22 बच्चे शामिल हैं। ‘मोक्ष’ नाम से यह टीम राज्यस्तर पर कबड्डी खेल चुकी है और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की तैयारी कर रही है। सुनीता ने इन बच्चों के सही मार्गदर्शन के लिए एक प्रशिक्षक भी नियुक्त किया है। बच्चियों का है कबीला नृत्य समूह: इन बच्चों का एक कबीला नृत्य समूह भी है। इसमें 35 बच्चियां शामिल हैं। इन बच्चियों ने बताया कि वे पढ़ाई के साथ-साथ कई कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति देने के लिए भी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने रामलीला के दौरान मंच पर प्रस्तुति दी थी। इसमें उनके समूह को पहला स्थान मिला था। बच्चों ने बताया कि उनकी नृत्य कक्षाओं का पूरा खर्च सुनीता उठा रही हैं।
मेट्रो ड्राइवर बनना चाहता है नूर: द्वारका सेक्टर-11 में रहता है, नूर हसन। नूर का कहना है कि पहले वह गणित विषय से बहुत डरता था लेकिन आज गणित उसका प्रिय विषय बन चुका है। वह मेट्रो के नीचे पला-बढ़ा है, इसलिए उसका सपना है कि वह बड़ा होकर मेट्रो का ड्राइवर बने। अभी वह कक्षा छह में है और कबड्डी की टीम का सदस्य भी है। उसके माता-पिता की चाय की छोटी-सी दुकान है। वह पिछले पांच सालों से सुनीता से जुड़ा हुआ है। वहीं, चार्टेर्ड अकाउंटेंट बनने की चाह रखने वाली कहानी ने बताया कि वह सुनीता से छह सालों से पढ़ रही हैं। उनका कहना है कि एक वक्त था, जब उसका मन गणित में नहीं लगता था लेकिन आज गणित में उसका दूसरा स्थान आता है। कहानी अभी हाईस्कूल में हैं और अपनी पढ़ाई के साथ छोटे बच्चों को भी पढ़ाती है।
