बिहार में महापर्व छठ हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। इसे समाज के सभी लोग पूरे विश्वास के साथ मनाते हैं। सूर्य भगवान की पूजा अर्चना कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। छठी मैया के लिए यह पुकार किन्नर समाज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ करता है। राजधानी पटना के विभिन्न घाटों पर लोग जुटते हैं और सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं। इसमें किन्नर समाज के लोग भी शामिल हैं।
गंगाघाट पर जाकर अर्घ्य देने को जुटती है भीड़ : कई किन्नर भी छठी मैया को अर्घ्य देती हैं। निर्जला व्रत रखती हैं और गंगा घाट पर जाकर छठी मैया से आशीर्वाद मांगती हैं। पिछले कई सालों से पटना के विभिन्न घाटों पर किन्नर समाज के लोग भी छठ करने पहुंचते हैं। तीन साल से छठ कर रहीं किन्नर आदर्शी वर्मा की मानें तो बचपन से ही उन्हें छठ के प्रति बहुत आस्था है। इस कारण वो 2016 से छठ करना शुरू कर दी थी। फुलवारी सरीफ की रहने वाले आदर्शी वर्मा ने बताया कि इस बार वो एलसीटी घाट पर जाकर छठ करेंगी। गंदगी की वजह से 2018 में घर में ही छठ किया था। लेकिन इस बार एलसीटी घाट पर जाकर भगवान सूर्य को अर्ध्य देंगी।
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समाज में समान अधिकार के लिए व्रत : किन्नर समुदाय को आज भी समाज में सम्मान वो नहीं मिलता जो अन्य समुदाय को मिलता है। ऐसे में समाज में समान अधिकार मिले, इसके किन्नर पार्वती हर साल छठ का व्रत करती हैं। पटना सिटी की रहने वाले पार्वती ने बताया कि हमें समाज में सम्मान मिले, इसके लिए छठी मैया का व्रत करती हूं। वहीं किन्नर पूजा पाठक ने बताया कि मां बनना अनमोल है। ऐसे में छठी मैया से मां बनने क लिए निर्जला व्रत रखती हूं। किन्नर पूजा पिछले चार साल से व्रत रख रही हैं।
घाट पर अर्घ्य देने में मिलती है एनर्जी : भले कई लोग छठ अब घरों से करना शुरू कर दी है। पटना के घाट पर नहीं जाती हों, लेकिन किन्नर समुदाय के लोग घाट पर गंगा में डुबकी लगाकर ही अर्ध्य देना पसंद करती हैं। कंकड़बाग की रहने वाले डिंपल ने बताया कि वो हर साल गंगा घाट पर ही छठी मैया को अर्घ्य देती हैं। वहीं गुलजारबाग की रहने वाली लीजा ने बताया कि घाट पर अर्घ्य देने में एनर्जी मिलता हैं। एक अलग अनुभव होता है जब घाट पर जाकर छठ करते हैं।

