उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनभद्र जिले के उम्भा गांव में विवादित जमीन को लेकर पिछले महीने हुए नरसंहार बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटाते हुए प्रकरण से जुड़े कई अफसरों और कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज करने के आदेश दिये। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सोनभद्र के डीएम अंकित कुमार अग्रवाल और एसपी सलमान ताज पाटिल को जिले से हटाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई।
इस रिपोर्ट के बाद हुई दोनों पर कार्रवाईः यह कार्रवाई अपर मुख्य सचिव (राजस्व) रेणुका कुमार की द्वारा सौंपी गई एक हजार पेज की रिपोर्ट के बाद की गई है। यह रिपोर्ट तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने तैयार की थी। रिपोर्ट शनिवार (3 अगस्त) को देर रात सौंपी गई थी। कमेटी में प्रमुख सचिव (श्रम) सुरेश चंद्रा और मिर्जापुर कमिश्नर एके सिंह भी थे।
हेलिकॉप्टर से चार्ज लेने पहुंचे नए अधिकारीः सोनभद्र में नए डीएम एस राजलिंगम और एसपी प्रभाकर चौधरी पदभार संभालने के लिए राजकीय हेलिकॉप्टर से भेजे गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों पर कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि इसके साथ ही 17 दिसम्बर 1955 को इस जमीन को आदर्श सोसाइटी के नाम गलत तरीके से अंतरित करने का आदेश पारित करने वाले तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण मालवीय, अगर जीवित हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गए हैं। इसके अलावा वर्ष 1989 में वहां के तत्कालीन परगनाधिकारी रॉबर्ट्सगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार जयचंद सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनभद्र के सहायक अभिलेख अधिकारी राजकुमार को निलंबित करके उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये गए हैं। इसके अलावा घोरावल के उपजिलाधिकारी विजय प्रकाश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। साथ ही पूर्व में निलंबित घोरावल के पुलिस क्षेत्राधिकारी अभिषेक सिंह, उपनिरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविंद मिश्र और बीट आरक्षी सत्यजीत यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिये गए हैं।
‘विवाद की जड़ में कांग्रेस नेता की करतूत’: उन्होंने बताया कि इस विवाद की जड़ 10 अक्टूबर 1952 को आदर्श कृषि सहकारी समिति के गठन से पड़ी थी। बिहार से कांग्रेस के तत्कालीन विधान परिषद सदस्य महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और दुर्गा प्रसाद राय ने अपने 12 नातेदारों के साथ मिलकर गठित की थी। सिंह ने वर्ष 1955 में उम्भा और सपही गांव में ग्राम पंचायत की 1300 से अधिक बीघा जमीन को इस सोसायटी के नाम पर तहसीलदार मालवीय से साठगांठ करके गलत तरीके से दर्ज कराया था। सोसाइटी से जुड़े लोग सोनभद्र के नहीं बल्कि बिहार के निवासी थे।
सपा पर भी सीएम का निशानाः मुख्यमंत्री ने कहा कि उस गलत काम के परिणामस्वरूप 1989 में सोसाइटी की जमीन को व्यक्तिगत नामों पर दर्ज किया गया। ये सारे विवाद यहीं से खड़े हुए। इन दोनों गांवों के रहने वाले लोग खासकर अनुसूचित जनजाति से जुड़े लोगों को जब वर्ष 2017 में इस जमीन को बेचे जाने का पता लगा तो विवाद बढ़ गया, जिसका दुष्परिणाम 17 जुलाई 2019 को घोरावल में सपा से जुड़े यज्ञदत्त के हाथों दुर्भाग्यपूर्ण घटना के रूप में सामने आया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
