दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 20 साल बाद दोबारा दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद का कामकाज संभाल लिया। लगातार 15 साल तक दिल्ली में कांग्रेसी हुकूमत चला चुकीं दीक्षित के साथ नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्षों हारुन युसूफ, राजेश लिलोठिया व देवेंद्र यादव ने भी पदभार ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष अजय माकन सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। पूर्व सांसद जगदीश टाइटलर भी समारोह में उपस्थित थे। टाइटलर के वहां होने पर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने सवाल उठाए। शीला दीक्षित ने जवाब में कहा कि कांग्रेस के समारोह में कौन शामिल होगा, यह तय करना हमारा काम है न कि भाजपा का।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुधवार को हुए समारोह में सूबे के तमाम कांग्रेसियों व बड़ी संख्या में जुटे पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में दीक्षित और उनके सहयोगियों ने कार्यभार संभाला। पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने एक प्रस्ताव पढ़कर दीक्षित को दिल्ली की कमान सौंपने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का धन्यवाद ज्ञापित किया। ‘शीला दीक्षित आई है, बदलाव की आंधी आई है’ के नारों के बीच दीक्षित ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि हमारा लक्ष्य है दिल्ली में कांग्रेस की सत्ता दोबारा स्थापित करना लेकिन यह काम वे अकेले नहीं कर सकतीं। उन्होंने पार्टी के तमाम नेताओं व कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे उनके साथ जुड़ें और एक बार फिर से कांग्रेस की हुकूमत कायम करें। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि अब लोकसभा चुनाव में ज्यादा देरी नहीं है। ऐसे में आप सभी को पूरी ताकत से जुटना है और अपने क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व सोनिया गांधी को दिल्ली से यह संदेश देना है कि सूबे में कांग्रेस न केवल मजबूत है, बल्कि विरोधी दलों का डटकर मुकाबला करने में भी सक्षम है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी लेकिन उनको भी समर्पण दिखाना होगा।
इस मौके पर अजय माकन ने अपने संबोधन में दीक्षित की अगुआई में 15 साल चली कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों की फेहरिस्त गिनाते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है जब हम सब मिलकर पार्टी को दोबारा सत्ता में लेकर आएं क्योंकि अब समूची दिल्ली उन दिनों को याद करने लगी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों के नतीजों से यह साफ हो गया है कि देश की जनता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है और दिल्ली के कांग्रेस जनों को भी इस लक्ष्य को पाने में जुट जाना चाहिए। समारोह को पार्टी के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह, जनार्दन द्विवेदी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व जोरदार नारेबाजी और मंत्रोच्चार के बीच दीक्षित निजामुद्दीन स्थित अपने घर से अजय माकन और तीनों नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्षों के साथ निकलीं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचने पर उनका जबरदस्त स्वागत हुआ। इस मौके पर उनके पूर्व सांसद बेटे संदीप दीक्षित के अलावा महाबल मिश्रा, जेपी अग्रवाल, जगदीश टाइटलर, सूबे में कांग्रेस सरकार में रहे पूर्व मंत्री, विधायक, पार्षद तथा पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।

कांग्रेस तय करेगी, किसे बुलाना है किसे नहीं: दीक्षित
कांग्रेस के कार्यक्रम में कौन शामिल होगा और कौन नहीं, यह तय करना भाजपा का काम नहीं है। यह बात शीला दीक्षित ने अपने पदग्रहण समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर के शामिल होने को लेकर भाजपा व अकाली दल के नेताओं के सवाल उठाने को लेकर कही। उन्होंने से कहा कि टाइटलर हमारी पार्टी के नेता हैं। हमारे साथी हैं और यदि वे पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं तो इसमें भला किसी और को क्यों एतराज होना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने टाइटलर को पहली पंक्ति में बैठाने को लेकर कहा कि ऐसा करके कांग्रेस सिख दंगों से जुड़े गवाहों को डराना चाहती है। कांग्रेस इस बात से भयभीत है कि सिख दंगों से जुड़े मामलों में टाइटलर और कमलनाथ को भी जेल भेजा जा सकता है। भाजपा नेता तेजेंद्र पाल बग्गा ने भी टाइटलर की मौजूदगी पर सवाल खड़े किए।

