भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे विधायक मानवेंद्र सिंह बुधवार को कांग्रेस में शामिल होंगे। मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आवास पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई जाएगी। इस दौरान कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे। मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से राजस्थान में भाजपा को विधानसभा चुनाव में करारा झटका लगना तय है। भाजपा ने आरोप लगाया कि मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस ने प्रलोभन देकर अपने यहां बुलाया है। राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अनबन के चलते पिछले चार सालों से भाजपा में किनारे चल रहे मानवेंद्र सिंह ने पिछले महीने बाड़मेर में स्वाभिमान रैली कर भाजपा छोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावना बन गई थी। लेखक और पत्रकार रहे मानवेंद्र वर्तमान में बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं और इससे पहले वे सांसद भी रह चुके हैं। मानवेंद्र सिंह के निकट सहयोगी रघुवीर सिंह के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनको पार्टी में शामिल करने की मंजूरी दे दी है और अपने आवास पर ही उन्हें सदस्यता ग्रहण कराने का फैसला किया है।

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और राष्ट्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत के साथ ही कांग्रेस के कई बड़े राजपूत नेता भी मौजूद रहेंगे। भाजपा के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह के परिवार का राजस्थान के राजपूत समाज पर गहरा प्रभाव है। जसवंत सिंह ने पिछला लोकसभा चुनाव बाड़मेर से निर्दलीय के तौर पर लड़ा था। उस समय वसुंधरा राजे ने उन्हें भाजपा का टिकट नहीं लेने दिया था। विधायक मानवेंद्र सिंह के भाजपा छोड़ने से पार्टी को पश्चिमी राजस्थान, जिसे मारवाड़ के नाम से जाना जाता है, में पार्टी को बड़ा नुकसान होने का अंदेशा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री राजे से नाराज होकर भाजपा को अलविदा कहने वाले मानवेंद्र सिंह दूसरे वरिष्ठ विधायक हैं। इससे पहले वरिष्ठ विधायक और आरएसएस से जुडेÞ घनश्याम तिवाड़ी ने भी भाजपा छोड़ अपना अलग दल बना लिया है। तिवाड़ी का ब्राहण समाज पर गहरा असर है। संसदीयकार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने मंगलवार को कहा कि मानवेंद्र सिंह के भाजपा छोड़ने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में राजपूत वर्ग पूरी तरह से भाजपा के साथ है। मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से भाजपा में खलबली मच गई है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा के परंपरागत समर्थक राजपूत और ब्राहण वर्ग के दो वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने से केंद्रीय नेतृत्व सकते में आ गया है। इसके चलते ही अब प्रदेश में चुनाव की कमान पूरी तरह से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संभाल ली है।