50 वर्षीय आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) कॉन्स्टेबल की ट्रेन से एक महिला और तीन बच्चों को बचाते हुए मौत हो गई। यह हादसा आजादपुर-आदर्शनगर रेलवे स्टेशन के पास हुआ। मृतक की पहचान जगबीर सिंह राणा के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि राणा को दूसरे रेलवे ट्रैक पर आई ट्रेन ने टक्कर मार दी जिसके चलते सिंह के सिर, हाथ और पैरों में गहरी चोटें आई थी। जिसके बाद नजदीकी अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
कब का है पूरा मामला: जानकारी के मुताबिक हादसा सोमवार (22 अप्रैल) रात करीब साढ़े नौ बजे का है, जब राणा गश्त पर थे। बताया जा रहा है कि गश्त के दौरान उन्होंने एक महिला और उसके तीन बच्चों को पटरियों पर देखा। वहीं उस वक्त सामने से होशियार एक्सप्रेस भी आ रही थी। ऐसे में बचाने के लिए उन्होंने महिला और बच्चों को दूसरे ट्रैक पर धकेल दिया, लेकिन जिस ट्रैक पर वो थे उस ट्रैक पर कालकाजी-शताब्दी ट्रेन आ रही थी। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिवार को तो वह रास्ते से हटाने में कामयाब रहे लेकिन वह खुद ट्रेन की चपेट में आ गए।
क्या कहा चश्मदीदों नेः पास के एक झुग्गी के लोगों ने यह पूरी घटना देखी। चश्मदीदों के मुताबिक ट्रैक पर राणा के शरीर से खून बह रहा था। मौके पर मौजूद एक कॉन्स्टेबल ने पीड़ित कॉन्स्टेबल का मोबाइल फोन ढूंढा और डायल सूची में पहले शख्स का नंबर मिलाया जो उसके बेटे का था। वहीं बेटे ने बताया कि, ‘मुझे बताया गया कि मेरे पिता एक दुर्घटना में घायल हो गए। जब तक मैं मौके पर पहुंचा उस समय वहां खड़ी पुलिस ट्रैक पर फोटो खींच रही थी। महिला और उनके बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे थे। मैं वहीं खड़ा था और सब कुछ देख रहा था लेकिन उन्हें सुन नहीं पा रहा था। मेरे पिता की मौत हो चुकी थी।’
National Hindi News, 23 April 2019 LIVE Updates: जानें दिनभर के अपडेट्स
आंखें करेंगे दानः मृतक राणा के परिजनों ने उनकी आंखें दान करने का फैसला किया है। उनके परिजनों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘ मेरे पिता दिन रात रेलवे ट्रैक पर गश्त का काम किया। आरपीएफ और उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने उनके अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें सम्मान दिया। हमने दूसरे लोगों की मदद करने के लिए उनकी आंखें दान में दे दी।’आरपीएफ के महानिरीक्षक जनरल वी के ढाका और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दयाबस्ती में मृतक के पुष्पांजलि समारोह के बाद उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव सोनीपत के जटोला गांव में ले जाया गया।
साल 1989 में आरपीएफ में हुए थे शामिलः कॉन्स्टेबल राणा साल 1989 में आरपीएफ में शामिल हुए थे और रेल राज्य मंत्री और मंडल रेलवे प्रबंधक से उन्हें दो अवॉर्ड मिले थे। आरपीएफ के सीनियर डीएससी अफसर ने बताया, ‘राणा एक बहुत ही मेहनती आरपीएफ अधिकारी थे। हमने उनका नाम अवॉर्ड के लिए भेजा है।’ राणा के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। राणा के बड़े बेटे रोहित सोनीपत में एमडीयू विश्वविद्यालय से बीए कर रहे हैं और अपने अंतिम वर्ष में हैं, जबकि उनका छोटा बेटा स्कूल में है। उनकी बेटियों की शादी हो चुकी है। रोहित ने कहा, ‘हमारे लिए अब जीवित रहना बहुत मुश्किल है।’ आरपीएफ और उत्तर रेलवे ने परिवार से कहा है कि वे उनकी मदद के लिए अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करेंगे।
