पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने कई कड़े वित्तीय फैसले लिए हैं। दरअसल सरकार वित्तीय संकट का सामना कर रही है। बिजली सब्सिडी को आंशिक रूप से वापस लेना, पेट्रोल और डीजल पर वैट में बढ़ोतरी और बस किराए में 23 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी सरकार के फैसलों शामिल है। इससे वह विपक्ष के निशाने पर भी आ गई है। सरकार अपने नए फैसलों से अतिरिक्त 2,500 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद कर रही है।

पावर सब्सिडी आउट

सभी उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली की पेशकश आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी वादे में की थी। हालांकि बिजली सब्सिडी में वापसी AAP के लिए एक विशेष रूप से कांटेदार कदम है। आप सरकार ने 2022 में सत्ता में आने के बाद पिछली कांग्रेस शासन द्वारा शुरू किए गए 7KW लोड तक 3 रुपये प्रति यूनिट के नियम को भी जारी रखा था।

सब्सिडी वापस लेने से गर्मी के महीनों में कम से कम 12 लाख और सर्दियों में 1.5 लाख उपभोक्ता प्रभावित होने की उम्मीद है। इससे राज्य के खजाने को प्रति वर्ष 1,800 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये का राजस्व भी बढ़ेगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि बिजली आपूर्ति पर 20% तक विभिन्न टैक्स लगाए गए हैं।

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हालांकि कुछ अधिकारियों ने बताया कि अगर आप सरकार ने अपने पहले चुनावी वादे को लागू करते हुए जुलाई 2022 में 300 यूनिट मुफ्त बिजली लागू की तो बिजली सब्सिडी वापस ले लेना बेहतर होता। अधिकारियों ने कहा कि इसके बाद सब्सिडी की जरूरत नहीं रही थी लेकिन सरकार ने सुझावों को अनसुना कर दिया।

पेट्रोल डीजल पर वैट में वृद्धि

मुफ्त बिजली का वादा दिल्ली और पंजाब में AAP का मुख्य वादा रहा है। वहीं राज्य में वैट में बढ़ोतरी के बाद पंजाब में पेट्रोल और डीजल अब उत्तर भारत में सबसे महंगे हैं। पेट्रोल जहां अब 61 पैसे बढ़कर 97.44 रुपये प्रति लीटर है, वहीं डीजल 92 पैसे बढ़कर 88.03 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

हालांकि भगवंत सिंह मान सरकार के पास कुछ ही विकल्प बचे थे क्योंकि नकदी संकट के कारण उसे इस महीने अपने कर्मचारियों के वेतन में देरी करने के लिए भी मजबूर होना पड़ा। वेतन 1 सितंबर के बजाय 4 सितंबर को भुगतान किया गया। एक अधिकारी ने कहा, “अब जब मुफ़्त चीज़ों ने राजकोष को ख़ाली कर दिया है और सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है, तो यह कदम उठाया गया है। अब सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ेगा। अगर और उपाय नहीं किए गए तो सरकार अगले महीने भी वेतन नहीं दे पाएगी। हम ओवरड्राफ्ट में हैं। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक सरकार का बकाया कर्ज बढ़कर 3.74 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।”

बिजली सब्सिडी को आंशिक रूप से वापस लेने से पहले अकेले इससे 2024-25 वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य के खजाने पर 24,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान था। वहीं राज्य का राजस्व घाटा भी 2024-25 में 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 2023-24 में पंजाब का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 47.6% था।

मुफ्त बस सेवा से भी सरकार को घाटा

अपने अन्य चुनावी वादों को पूरा करते हुए आप सरकार सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त परिवहन की सुविधा भी देती है, जिससे हर साल सरकारी खजाने पर लगभग 650 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इस साल की शुरुआत में इस योजना को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे सीएम भगवंत मान ने खारिज कर दिया था। लेकिन फिर इस साल का बजट बिना किसी नए कर प्रस्ताव के पेश करने के बाद मान सरकार ने पुराने वाहनों पर हालिया ‘ग्रीन टैक्स’ सहित नए टैक्स लगा दिए थे। पिछले महीने मान सरकार ने मोटर वाहन टैक्स को 0.5% से बढ़ाकर 1% कर दिया था।

विपक्ष के नेता (एलओपी) और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने AAP सरकार पर राजस्व बढ़ाने के बहाने ‘आम लोगों की जेब में छेद करने’ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “अपने अब तक के सबसे शर्मनाक कदमों में से एक में AAP सरकार ने खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं और सब्सिडी वाली बिजली देने की योजना भी वापस ले ली है। डीजल की कीमत में वृद्धि से न केवल किसानों को महंगा पड़ेगा, बल्कि महंगाई भी बढ़ेगी।”

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “आप सरकार जिस तरह से अर्थव्यवस्था को संभाल रही है, उससे पता चलता है कि पंजाब आप शासन के तहत तेजी से दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है।” उन्होंने सरकार पर अपने ‘फर्जी प्रचार खर्च’ पर सालाना 750 करोड़ रुपये बर्बाद करने का भी आरोप लगाया। बाजवा ने कहा कि अगर उसे वास्तव में राज्य की बिगड़ती वित्तीय सेहत की इतनी परवाह है, तो उसे इतनी लापरवाही से खर्च करने से बचना चाहिए।