महाराष्ट्र के पुणे नगर निगम (PMC) में बीजेपी की जीत हुई है। पुणे की 165 सीटों में से 83 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने के कारण यह उम्मीद की जा रही थी कि महिला पार्षदों की संख्या पुरुष पार्षदों से अधिक होगी। हालांकि परिणाम ने सभी को चौंका दिया। सामान्य श्रेणी के वार्डों से छह महिलाओं ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इससे महिला पार्षदों की कुल संख्या 89 हो गई।

83 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के अनुसार स्थानीय निकायों में आधी सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है। पीएमसी में 83 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। 40 वार्डों में दो-दो और एक वार्ड में तीन सीट रिज़र्व थी। कोंढवा बुद्रुक-येवलेवाड़ी वार्ड में सभी चार निर्वाचित पार्षद महिलाएं हैं। भाजपा की अर्चना जगताप, वृषाली कामठे, पूजा कदम और रंजना तिलकर ने जीत हासिल की है। यह राज्य का एकमात्र वार्ड है जहां सभी निर्वाचित सदस्य महिलाएं हैं। अर्चना जगताप और रंजना तिलकर ने सामान्य श्रेणी से जीत हासिल की।

सामान्य वर्ग में जीतने वालों में सहकारनगर-पद्मावती वार्ड से वीना घोष भाजपा में शामिल हैं। वीना घोष ने शहर के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख सुभाष जगताप को हराया। रविवार पेठ और नाना पेठ से भाजपा की पलवी जावले, शिवाजीनगर-मॉडल कॉलोनी वार्ड से भाजपा की निवेदिता एकबोटे और कलास-धनोरी वार्ड से भाजपा की संगीता दंगत ने जीत हासिल की है।

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भाजपा ने क्या कहा?

शहर भाजपा प्रमुख धीरज घाटे ने कहा, “यह पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं पीएमसी में पार्षद चुनी गई हैं। भाजपा ने महिला उम्मीदवारों को अधिकतम टिकट दिए थे, चाहे सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो या सामान्य वर्ग के लिए। हमें गर्व है कि छह महिला उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में पुरुष प्रतिद्वंद्वियों को हराकर अपनी क्षमता साबित की।”

धीरज घाटे भी पीएमसी में पार्षद चुने गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बड़ी संख्या आम सभा और निर्वाचित प्रतिनिधियों के विभिन्न नागरिक पैनलों के कामकाज में ईमानदारी और अनुशासन लाएगी। एक नगर निगम अधिकारी ने कहा कि महिला पार्षदों द्वारा महिला कर्मचारियों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने की संभावना है। उन्होंने आगे कहा, “हमें खुशी है कि अब पीएमसी में अधिक महिला पार्षद हैं। वे हमारी समस्याओं को समझेंगी और उन्हें उचित स्तर पर उठाएंगी।” पढ़ें पुणे में चाचा-भतीजे का नहीं चला जादू