लोक जनशक्ति पार्टी के नेता पशुपति पारस ने स्वीकार किया कि है कि लोजपा में चिराग पासवान से अलग हटकर गुट बनाने में जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह ने उनकी मदद की थी। एबीपी न्यूज के साथ बात करते हुए पारस ने कहा कि ललन सिंह ने हमारा सहयोग किया साथ ही उन्होंने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि चिराग पासवान के साथ कोई समझौते की उम्मीद है। जब पशुपति पारस से पत्रकार ने पूछा कि आपको मंत्री बनाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कितना योगदान रहा तो उन्होंन कहा कि नीतीश कुमार से मेरे रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं। वो भी एनडीए के साथ हैं हम भी साथ हैं उन्होंने भी सहयोग किया। सबकी सहमती से ही मुझे मंत्री बनाया गया है।

‘एनडीए के फैसले के साथ हूं’: जातिगत जनगणना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं किसी के साथ भी नहीं हूं और किसी के विरोध में भी नहीं हूं लेकिन गठबंधन का जो फैसला होगा मैं उसके साथ रहूंगा। साथ ही पारस ने कहा कि मैं भारत सरकार में मंत्री भी हूं सरकार का जो फैसला होगा मैं उसके साथ हूं। आम सहमति के साथ जो फैसला लिया जाएगा मैं सबके साथ रहूंगा।

चिराग पासवान पर बोला हमला: चिराग पासवान पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि चिराग ने अपने पिता रामविलास पासवान को अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उन्होंने कहा कि वो मुझे अपना चाचा मानने से भी इनकार करते रहे हैं। अब कुछ भी हो जाए अब चिराग के साथ वो कभी नहीं आ सकते हैं।

90 प्रतिशत जनता मेरे साथ: पशुपति पारस ने कहा कि हाजीपुर की 90 प्रतिशत जनता मेरे साथ है। चिराग पासवान को मेरे स्वागत में उमड़ी भीड़ को देखकर समझ आ गया होगा। स्याही फेंकने पर पशुपति पारस ने कहा कि आप इतिहास देखें जिस दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव था उस दिन भी इस तरह की घटना हुई थी। ये पेशेवर लोग हैं जो पैसों के लिए यह सब करते रहे हैं। मैंने रामविलास जी के कहने पर हाजीपुर से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।