ओडिशा में प्रमुख किसान संगठन नाबा निर्मम कृषक संगठन (एनएनकेएस) के अलावा विभिन्न किसान संगठनों की तरफ से सुबह से शाम तक बुलाए बंद की वजह से राज्य खासा प्रभावित हुआ। किसानों से जुड़ी समस्या और विभिन्न मांगों के चलते गुरुवार (21 फरवरी, 2019) को राज्य के किसान संगठनों ने 12 घंटों का बंद बुलाया। ओडिशा कांग्रेस प्रमुख निरंजन पटनायक ने बीते मंगलवार को ही एनएनकेएस को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। जो किसानों के लिए उपज में पेंशन और उचित मूल्य दिए जाने की मांग कर रहा था। बंद का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं।
भाजपा स्टेट यूनिट चीफ बसंत पंडा ने भी कहा कि उनकी पार्टी बंद का समर्थन करेगी। भाजपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र में किसानों को अपनी राय रखने और विरोध करने का अधिकार है। राज्य सरकार के पास समय है और वह फिर से उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। हम राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करेंगे। जानकारी के मुताबिक गुरुवार को पुलिस ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 200 लोगों को पकड़ा। मामले में पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के चलते राज्य में अलग-अलग स्थानों पर भारी संख्या पुलिस बल की तैनाती की गई।
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बता दें कि बंद के दौरान किसानों ने हाथों में प्लेकार्ड पकड़ और सरकार विरोधी नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। बंद के दौरान आंदोलनकारी किसानों ने सड़के जाम कीं और नेशनल हाईवे में वाहनों की आवाजाही पर भी अवरोध पैदा किया। मामले में पुलिस कमिश्नर सत्यजीत मोहंते ने पत्रकारों को बताया कि हमने भुवनेश्वर और कटक में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस की करीब 30 टुकड़ियों को भुवनेश्वर में तैनात किया गया और 15 टुकड़ियां कटक में तैनात की गईं।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि दोनों शहरों में सामान्य जन जीवन अप्रभावित रहा। जानकारी के मुताबिक सरकारी कामकाज पर बंद का असर नहीं पड़ा। मगर शैक्षणिक संस्थानों और बड़ी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद नजर आए। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन सुविधा में भी लोगों को खासी परेशानी हुई।

Highlights
किसान संगठनों की विभिन्न मांग के चलते ओडिशा में 12 घंटे का बंद जारी है। बंद बुलाने से पहले किसान संगठन प्रमुख ने पहले ही साफ कर दिया था कि बंद का स्कूलों और उसके कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने बच्चों की परीक्षा के चलते बंद टालने की अपील की थी। मगर किसान संगठनों ने इससे इनकार कर दिया था। ताजा जानकारी के मुताबिक राज्य में बंद की वजह से स्कूलों पर कोई असर नहीं पड़ा है। यहां स्कूल खुले हैं और बाजार को बंद से अछूता रखा गया है। दूसरी तरफ बस परिवहन पर बंद का असर देखने को मिला है।
अपनी विभिन्न मांगों के चलते प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन को सीपीआईएम ने अपना समर्थन देने की घोषणा की है। पुलिस ने बताया कि कांधीमल जिले के इलाकों से ऐसे कई पोस्टर्स मिले हैं जिनमें पार्टी ने लोगों से NNKS के बंद का समर्थन करने की अपील की है।
गुरुवार को 12 घंटे के लिए बुलाए बंद के दौरान NNKS सदस्यों ने कटक में लोगों को ले जारी एक बस रोक दी। कार्यकर्ता बस के सामने आ गए और वाहन को रास्ता देने से इनकार कर दिया। विरोध कर रहे किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है उन्हें प्रति महीना पांच हजार रुपए सुरक्षा भत्ता दिया जाए।
NNKS नेता ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को 12 घंटे का बंद बुलाया है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार की दलीलों का मकसद बंद को नाकाम करना है। हालांकि उन्होंने फिर साफ किया कि बंद की वजह से परीक्षा में किसी तरह का व्यवधान नहीं डाला जाएगा। बंद के दौरान परीक्षा से जुड़ी सामग्री ले जा रही गाड़ियों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
संयोजक अक्षय कुमार ने कहा कि NNKS परीक्षा के प्रति संवेदनशील है और इसलिए परीक्षा से संबंधित सामग्री ले जाने वाले वाहनों को पकड़ा नहीं लिया जाएगा।