बिहार में विपक्षी महागठबंधन के विधायकों ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से राज्य विधानमंडल में अपने गठबंधन का नेता चुन लिया है। यह फैसला सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के पांच दिवसीय सत्र से पहले शनिवार को आयोजित एक बैठक में लिया गया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा, ‘तेजस्वी यादव को राज्य विधानमंडल में महागठबंधन का नेता चुना गया है। निश्चित रूप से, वह विधानसभा में हमारी पार्टी के नेता भी होंगे।’
दिल्ली गए हुए हैं कांग्रेस विधायक
हैरान करने वाली बात यह रही कि बैठक से कांग्रेस के विधायक गैर हाजिर रहे और कांग्रेस के सिर्फ एक एमएलसी समीर कुमार सिंह ही इसमें शामिल हुए। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के सभी विधायक पार्टी की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली गए हुए हैं।
‘बिहार में करारी हार के पीछे एक वजह है कांग्रेस…’
कांग्रेस के एमएलसी समीर कुमार सिंह ने कहा, ‘तेजस्वी यादव पर फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है और वह विपक्ष के नेता भी होंगे।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि हम सदन में जनता से जुड़े सभी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अगर एनडीए चुनाव के दौरान किए गए वादों से मुकरने की कोशिश करता है तो हम उसका विरोध करेंगे।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसमें एनडीए ने 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिलीं, जिनमें से 25 आरजेडी ने, छह कांग्रेस ने और बाकी चार सीटें भाकपा (माले) लिबरेशन, सीपीएम और आईआईपी ने जीती।
बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने आगामी सत्र के लिए अपनी रणनीति की समीक्षा की और सदन के अंदर नीतीश सरकार को घेरने पर विचार-विमर्श किया।
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कांग्रेस-आरजेडी ने की थी नतीजों की समीक्षा
कांग्रेस ने हाल ही में दिल्ली में बिहार के चुनाव नतीजों को लेकर समीक्षा बैठक की थी जबकि आरजेडी की ओर से भी 17 नवंबर को तेजस्वी यादव के आवास पर पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई गई थी। आरजेडी की बैठक में भी चुनाव नतीजों और संगठनात्मक मामलों पर चर्चा हुई थी। उस दौरान आरजेडी के विधायकों ने तेजस्वी को सर्वसम्मति से पार्टी के विधायक दल का नेता चुना था।
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है जबकि प्रचंड बहुमत मिलने की वजह से एनडीए के विधायक पूरे आत्मविश्वास के साथ सदन में दिखाई देंगे। यह सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा। इसमें नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण, विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव, राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही सरकार के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाजों को शामिल किया जाएगा।
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