गौतमबुद्धनगर जिले में करीब चार लाख बैंक खाते पिछले दस वर्षों से बिल्कुल निष्क्रिय पड़े हुए हैं। इनमें कुल 190 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा है, जिस पर अब तक किसी भी खाताधारक या उसके परिजनों ने दावा नहीं किया है।

तय नियमों के तहत इन खातों को निष्क्रिय घोषित करते हुए बैंकों ने संबंधित जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) को सौंप दी है। आरबीआइ ने ऐसी निष्क्रिय खातों के वास्तविक मालिकों को ढूंढने के लिए देशभर में जिलेवार शिविरों का आयोजन शुरू किया है। नोएडा में लग रहे इस शिविर में अब तक केवल 213 खाताधारकों के परिजन पहुंचे हैं, जिन्हें कुल 1.35 करोड़ रुपए प्रदान किए जा चुके हैं।

बैंकिंग नियमों के अनुसार, एक वर्ष तक लेनदेन न होने पर खाता निष्क्रिय हो जाता है और दस वर्ष तक कोई गतिविधि न होने पर खाता ‘अनक्लेम्ड’ की श्रेणी में आते हुए उसकी जानकारी आरबीआइ को भेज दी जाती है।

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बैंक खाते

इसके बाद आरबीआइ और बैंक मिलकर खाताधारकों या उनके वारिसों को तलाशते हैं। नोएडा में चल रहा यह शिविर 31 दिसंबर तक जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कई खाते भी हैं जिनमें एक लाख से दस लाख रुपए तक की राशि जमा है, लेकिन अब तक कोई दावा करने नहीं पहुंचा है।

आरबीआइ ने जनता को जागरूक करने के लिए ‘आपकी पूंजी आपका अधिकार’ अभियान चलाया है। खाताधारक या उनके परिजन उद्गम पोर्टल के माध्यम से अपने पुराने, निष्क्रिय या अनक्लेम्ड खातों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।