Noida Techie Death News: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में शनिवार तड़के एक खाली प्लॉट पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई। इससे लापरवाही और बचाव काम में देरी को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। युवराज मेहता अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे में उनकी गाड़ी कथित तौर पर कंट्रोल से बाहर हो गई और एक 90 डिग्री टर्न पर बाउंड्री को तोड़ते हुए गड्ढे में जा गिरी।
कई मुश्किलों का सामने करते हुए मेहता किसी तरह से डूबी हुई कार की छत पर चढ़ गए और मदद के लिए अपने पिता को पुकारा। लगभग 90 मिनट तक उन्होंने गुहार लगाई कि उन्हें खाई से बाहर निकाल लिया जाए। जब उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
क्या रहीं प्रमुख खामियां?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों और जांच करने वाली टीम की तरफ से उजागर की गई अहम खामियों में से एक सार्वजनिक सड़क के बगल में पानी से भरा खुला हुआ एक गड्ढा था। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और नोएडा अथॉरिटी ने 2023 में हुए समझौते के बावजूद, क्षेत्र में पानी के मैनेजमेंट के लिए सेक्टर 150 में एक रेगुलेटर के निर्माण में देरी की थी। हिंडन और यमुना नदियों के संगम पर वाटर मैनेजमेंट की कमी की वजह से खोदी हुई एक व्यावसायिक जमीन में बारिश का पानी जमा हो गया। इससे वह जमीन बिना किसी बाड़ के एक जल निकाय में तब्दील हो गई। वहां पर ना तो जल निकासी की व्यवस्था थी और ना ही किसी तरह के सेफ्टी बैरियर थे।
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जिस जगह पर यह घटना हुई, वहां पर एक खतरनाक 90 डिग्री का टर्न भी था, लेकिन सुरक्षा के उपाय केवल नाममात्र ही थे। इस टर्न पर लगी बाड़ इतनी कमजोर थी कि कोई वाहन उसे पार कर सकता था और उस क्षेत्र में मजबूत बैरियर, वार्निंग साइन और रोशनी की कमी थी। कोहरे के कारण कम विजिबिलिटी ने जोखिम को और बढ़ा दिया। नोएडा की डीसीपी (ट्रैफिक) मनीषा सिंह ने कहा कि पुलिस को बैरिकेड्स या साइनबोर्ड की कमी को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं मिली है।”
समय पर बचाव नहीं
लगभग 90 मिनट होने के बाद भी इमरजेंसी टीम अभियान चलाने में सफल नहीं रही। अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रस्सियां छोटी पड़ गईं, क्रेनें घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं और बचावकर्मी पानी में सुरक्षित तौर से उतरने से पहले ट्रेंड नहीं थे। पुलिस और फायर सर्विस समेत कई एजेंसियों और एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन बचाव अभियान विफल रहा।
नोएडा पुलिस के एसीपी हेमंत उपाध्याय ने कहा कि कोई भी पानी में नहीं उतरा क्योंकि बचावकर्मी इस बात से भयभीत थे कि अगर वे सुरक्षा उपायों के बिना पानी में उतरे तो और ज्यादा लोग हताहत हो सकते हैं।”
सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की
जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया और मेहता की मौत के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एसआईटी का गठन किया। सीएमओ के बयान के मुताबिक, एसआईटी की अध्यक्षता एडीजी (मेरठ जोन) भानु भास्कर करेंगे। इसमें मेरठ डिविजनल कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग (मेरठ) के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा सदस्य होंगे। पैनल को पांच दिनों के अंदर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि 27 साल के इंजीनियर युवराज मेहता की सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में बताया कि इंजीनियर की मौत पानी में डूबने के कारण दम घुटने और कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
