दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का मुख्यमंत्री केजरीवाल का ‘सपना’ हाई कोर्ट के फैसले के बाद टूटा नहीं है। अभी शुक्रवार (5 अगस्त) तो इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला होना बाकी है। फिर साफ हो जाएगा कि आने वाले वक्त में दिल्ली किसके अधीन रहेगी। इससे पहले गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हए ‘आप’ की तरफ से दायर की गई याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका में आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल नजीब जंग के अधिकारों को चुनौती दी थी। पार्टी का कहना था कि मुख्यमंत्री उपराज्यपाल की आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि उपराज्यपाल को सिर्फ सलाह के आधार पर काम करने का अधिकार है। कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज कर उपराज्यपाल को राज्य का प्रशासनिक मुखिया बताया था।
आर्टिकल 131 के अनुसार केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच हुए किसी भी विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की ही है। ऐसे में आज आने वाले फैसले पर सबकी नजर है। वहीं कल आए फैसले पर केजरीवाल कुछ नहीं बोल पाए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह 10 दिनों के विपश्यना ध्यान शिविर में हिस्सा लेने के लिए सोमवार (1 अगस्त) को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला चले गए थे।
आप ने कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार नजीब जंग के जरिये दिल्ली पर राज चलाना चाहती है। यह सारा विवाद मुख्य तौर पर तब शुरू हुआ जब नजीब जंग ने अपनी पसंद के अफसर को एंटी करप्शन ब्रांच का प्रमुख बनाया। हालांकि आम आदमी पार्टी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।
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