कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रफाल विमान सौदे को लेकर कहा कि वायुसेना के अधिकारियों, जवानों, शहीद पायलटों के परिवारों और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के कर्मचारियों का अपमान करने वालों को न्याय के जद में लाया जाएगा। दूसरी ओर पार्टी ने एकबार फिर आरोप लगाया कि राजग सरकार ने सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अनुभव की जगह दोस्ती को तरजीह दी और विमान सौदे से संबंधित ऑफसेट ठेका रिलायंस डिफेंस को देना मुनासिब समझा। राहुल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि हम भारत की सेवा करने वाले वायुसेना के हर अधिकारी व जवान, हर शहीद पायलट के परिवार, एचएएल के साथ काम करने वाले हर व्यक्ति का दर्द महसूस करते हैं। हम उन सभी लोगों को न्याय के जद में लाएंगे जिन्होंने आपका अपमान किया है।

पार्टी नेता कपिल सिब्बल ने भी कहा कि राजग सरकार ने अनुभव पर दोस्ती को तवज्जो दी। उन्होंने कहा कि रक्षा सौदे के मामले में सरकार ने अब कृषि राज्यमंत्री को मैदान में उतार कर यह साफ कर दिया कि अब रक्षा मंत्री के पास बचाव के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की इजाजत के बगैर रिलायंस डिफेंस का चुनाव संभव ही नहीं था। रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) का हवाला देते हुए सिब्बल ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि सरकार को सौदे से जुड़ी बारीक से बारीक जानकारी नहीं हो। इससे पहले पार्टी ने रफाल विमान सौदा मामले में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को लेकर भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया।

पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए की सरकार ने ठेका सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को दिया था। लेकिन आपने सरकारी कंपनी से ठेका लेकर निजी कंपनी को दे दिया। मामले में भाजपा द्वारा रॉबर्ट वाड्रा का नाम लेने से जुड़े सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि कृषि राज्य मंत्री (गजेंद्र शोखावत) को यह पता होना चाहिए कि निविदा अगस्त 2007 में जारी गई थी। 12 दिसंबर, 2012 को यह निविदा खुली। 13 मार्च 2014 को कांग्रेस की सरकार ने ऑफसेट साझेदार का ठेका एचएएल को दिया, लेकिन राजग सरकार ने इसे रिलायंस को दे दिया। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता हकीकत जानना चाहती है।