केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच आए दिन होने वाली जुबानी जंग के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उपराज्यपाल ने बिजली की अनिर्धारित कटौती को लेकर बिजली कंपनियों से हर्जाना वसूलने संबंधी आप सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है।उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रविवार को एक सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली कंपनियों के साथ मिली हुई है। उन्होंने अंदेशा जताया कि उपराज्यपाल बिजली बिलों पर सबसिडी और न्यूनतम मजदूरी संबंधी सरकार के फैसले को भी पलट सकते हैं। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) ने इसी साल अप्रैल में आदेश पारित कर बिजली कंपनियों से कहा था कि वह बिजली की अनिर्धारित कटौती के लिए उपभोक्ताओं को हर्जाना दें।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमने एक आदेश पारित किया था जिसके तहत बिजली वितरण कंपनियों को बिजली की अनिर्धारित कटौती के लिए हर्जाना देना पड़ता। वे हर एक घंटे की कटौती पर 100 रुपए का जुर्माना देने को मजबूर थीं।’ केजरीवाल ने कहा, ‘15 दिनों पहले एलजी साहब ने इस मामले से जुड़ी फाइलें मंगार्इं और इस आदेश को रद्द कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिजली कपंनियों से मिले हुए हैं। मोदी जी ने यह आदेश क्यों पलटवाया?’ उन्होंने कहा कि इस आदेश से दिल्ली में बिजली की स्थिति बेहतर हो जाती लेकिन मोदी जी ने यह नहीं होने दिया। केजरीवाल ने लोगों से कहा कि अगर बिजली सबसिडी और न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के फैसले को पलटने जैसा कोई कदम उठाया जाता है तो प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल का घेराव किया जाएगा।

‘15 दिनों पहले एलजी साहब ने इस मामले से जुड़ी फाइलें मंगार्इं और इस आदेश को रद्द कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिजली कपंनियों से मिले हुए हैं। मोदी जी ने यह आदेश क्यों पलटवाया?’