आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना की आड़ में वाराणसी के प्राचीन मंदिरों को तोड़ रही है। इसका विरोध करने वाले ‘आप’ नेताओं के खिलाफ राज्य सरकार ने मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने मांग की है कि कॉरिडोर की आड़ में तोड़े गए मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया जाए, वरना पार्टी कार्यकर्ता अगले महीने पूरे प्रदेश में यात्रा निकाल कर भाजपा के धर्म विरोधी चेहरे को बेनकाब करेंगे।

संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने निजी विधेयक के जरिए काशी को विशेष शहर का दर्जा दिए जाने की मांग की है। यहां पर धार्मिक गतिविधियां व ऐतिहासिक मंदिर है। इस पहल से इन्हें बचाया जा सकेगा। इन्हें बचाने के लिए भाजपा को सर्वसम्मति से इस विधेयक को मंजूर करना चाहिए, ताकि इन संरक्षित व ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को बचाया जा सके। सिंह ने कहा कि सत्ता व पुलिस के बल पर उत्तर प्रदेश में मंदिरों को तोड़ा व गिराया गया है। इसका विरोध करने वाले स्थानीय लोगों की बात नहीं सुनी गई। ‘आप’ ने इसके विरोध में अयोध्या से वाराणसी तक की दो दिवसीय यात्रा भी निकाली थी, लेकिन मंदिर तोड़ने की कार्रवाई रोकने के बजाय राज्य सरकार ने उल्टा उनके और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से एक हफ्ते के भीतर ये मुकदमे वापस लेने, मंदिरों तोड़ने का काम रोकने और टूटे हुए मंदिरों का पुनर्निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गर्इं तो 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन वे अयोध्या में धरना प्रदर्शन करेंगे।

नहीं सुना गया आलोक वर्मा का पक्ष
‘आप’ सांसद संजय सिंह ने कहा कि सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को हटाने से पहले केंद्र सरकार ने उनका पक्ष नहीं सुना, जोकि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि रफाल विमान मामले की जांच रोकने के लिए आलोक वर्मा के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

भाजपा कार्यालय में तैयार हुआ आरोपपत्र
जेएनयू राष्ट्रद्रोह मामले पर संजय सिंह ने कहा कि कन्हैया कुमार व अन्य लोगों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र भाजपा कार्यालय में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से 90 दिन पहले ही आरोपपत्र क्यों आया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।