दिल्ली में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास के इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए एमसीडी ने मंगलवार देर रात अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बुधवार को तुर्कमान गेट के पास स्थित 0.195 एकड़ भूमि पर बने दरगाह और सैयद फैज इलाही मस्जिद के आसपास की इमारतों को ध्वस्त किया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को विध्वंस पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
मध्य रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा को बताया, “अभियान के दौरान, कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी करके अशांति फैलाने का प्रयास किया। संयमित और न्यूनतम बल प्रयोग करके स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लाया गया और बिना किसी तनाव के सामान्य स्थिति बहाल की गई।”
अतिक्रमण हटाने के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर पथराव किया जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने बाद में कहा कि संयमित बल प्रयोग से स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। पुलिस के अनुसार, कानून-व्यवस्था के व्यापक इंतजाम पहले से ही किए गए थे और वरिष्ठ अधिकारियों को कई क्षेत्रों में तैनात किया गया था। स्थानीय शांति समितियों के सदस्यों के साथ समन्वय बैठकें भी की गईं। पुलिस ने एक बयान में कहा कि स्थिति अब सामान्य है।
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फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंके गए
वहीं, डीसीपी निधिन वालसन ने बताया, “कार्रवाई अभी जारी है, एमसीडी ध्वस्तीकरण कर रही है। हमने सुरक्षा के लिए अपने कर्मचारियों को तैनात किया है। कार्रवाई रात करीब 1 बजे शुरू हुई। एमसीडी ने उच्च न्यायालय के आदेशानुसार अतिक्रमित जमीन पर तोड़फोड़ की। रात में पुलिस पर पत्थर फेंके गए। हमने उन्हें रोकने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चली। चार से पांच अधिकारियों को मामूली चोटें आईं। सीसीटीवी फुटेज, ग्राउंड फुटेज और बॉडी कैमरा फुटेज मिलते ही हम उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।”
100 साल से अधिक पुरानी है मस्जिद, प्रबंधन समिति का दावा
मस्जिद की प्रबंधन समिति का हालांकि दावा है कि यह 100 साल से अधिक पुरानी वक्फ की संपत्ति है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। प्रबंध समिति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की क्योंकि एमसीडी ने 1 जनवरी को इसे ध्वस्तीकरण के लिए चिन्हित किया था और समिति को सूचित किया था कि विध्वंस 7 जनवरी को होगा।
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समिति ने अपनी याचिका में पिछले वर्ष 22 दिसंबर के एमसीडी के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें नगर निगम ने फैसला सुनाया था कि 0.195 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनी कोई भी संरचना अतिक्रमण और सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग है। दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रस्तुत करते हुए कि उसे अतिक्रमण हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है, समिति केवल मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग कर रही है, जो उसके अनुसार 0.195 एकड़ की सीमा से बाहर है।
