दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) में 262 करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ है। यह साइबर ठगी का मामला है और इससे 8758 कारोबारियों के खाते जुड़े हैं। इन खातों से टैक्स जमा कराया जा रहा था लेकिन वह सरकारी खजाने में जमा नहीं हो रहा था। दिल्ली सरकर ने इस मामले में मामला दर्ज कराया है और आर्थिक अपराध शाखा को मामले की जांच सौंपी है। फर्जीवाड़े के लिए सरकारी व बैंकों के आॅनलाइन सिस्टम को ब्रेक किया गया है। जहां पर आसानी से टैक्स जमा करने की जानकारी दी जा रही थी और बाद में कारोबारी को उसकी पर्ची भी दी जा रही थी। रिकार्ड में यह साफ आया है कि कारोबारियों से पैसा लिया गया पर यह पैसा सरकारी खजाने में नहीं गया। ये गड़बड़ी 2013 से चल रही थी। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले में 3 माह पहले शिकायत मिली थी और दो-तीन दिन में सुराग मिले हैं। इसकी जांच शुरू की गई। उन्होंने बताया कि जीएसटी मद का पैसा 27 बैंक खातों के माध्यम से सरकारी खजाने तक पहुंचता है।

जीएसटी में गड़बड़ी करने लिए सभी ट्रेडर के फर्जी आइडी बनाए गए थे और 13 बैंकों में खाते खोले गए थे। इसके लिए जीएसटी व बैंक के आइडी व पासवर्ड ब्रेक किए गए थे। इन सभी 13 बैंकों में आइडी तोड़े गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। सिसोदिया ने आशंका जताई कि यह फर्जीवाड़ा इससे भी पहले से चल रहा हो। अब इस पूरे मामले की जांच होगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में अगर विभाग में कोई मिलीभगत मिलेगी तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वैट आयुक्त एच राजेश प्रसाद के मुताबिक ये गड़बड़ी 30 सितंबर 2013 से 25 सितंबर 2018 तक के दौरान सामने आई है। इस दौरान विभिन्न ट्रेडर के खातों से 31027 लेनदेन किए गए हैं। इनकी मदद से 262,62,73,327 रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। इस सभी डीलर के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कराया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।