कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया लगातार कहते रहे हैं कि वह हाईकमान के निर्देशों का पालन करेंगे। इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया नया कीर्तिमान रचने वाले हैं। 7 जनवरी को सिद्धरमैया कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। सिद्धरमैया ने सोमवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय जनता के आशीर्वाद को दिया। देवराज उर्स ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में सात साल और 239 दिन सेवा की थी। सिद्धरमैया बुधवार को सात साल और 240 दिन पूरे कर लेंगे।

सिद्धरमैया ने क्या कहा?

सिद्धरमैया ने कहा कि जहां देवराज उर्स शासक वर्ग से संबंधित थे, वहीं वह सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय (कुरुबा या चरवाहा) से आते हैं। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जनता के आशीर्वाद से कल (मंगलवार को) कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का दिवंगत डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड टूट जाएगा। गर्व की बात है कि मैं और देवराज उर्स दोनों मैसूरु से हैं।”

पत्रकारों ने पूछा कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वह यह रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे तो सिद्धरमैया ने स्वीकार किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनना तो दूर, मंत्री बनने की भी कल्पना नहीं की थी। सिद्धरमैया ने कहा, “मैंने तो बस यही सोचा था कि तालुक बोर्ड सदस्य बनने के बाद मैं विधायक बनूंगा। मैं अब तक आठ चुनाव जीत चुका हूं। मैं दो संसदीय चुनाव और दो विधानसभा चुनाव हार चुका हूं। अपने जीवन में मैंने तालुक चुनावों सहित कुल 13 चुनाव लड़े हैं।”

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देवराज उर्स से उनकी तुलना के बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, “देवराज उर्स सामाजिक रूप से पिछड़े नहीं थे। वास्तव में वह शासक वर्ग से थे। वह उस समुदाय से थे जिसकी आबादी ज्यादा नहीं थी, लेकिन वह एक लोकप्रिय नेता थे।”

सिद्धरमैया ने खेल का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि उनकी और देवराज उर्स की कोई तुलना नहीं है। सिद्धरमैया ने कहा कि देवराज उर्स का दौर वर्तमान से भिन्न था और देवराज उर्स ने सीधे जनता से धन इकट्ठा कर चुनाव लड़ा था। उन्होंने कहा, “1962 में लोगों ने उन्हें धन दिया और उनके पक्ष में मतदान किया। अब समय बदल गया है। रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं।” सिद्धरमैया ने खेल का उदाहरण देते हुए अपनी इस उपलब्धि की तुलना विराट कोहली द्वारा क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने से की।