स्वच्छता के मामले में देश में नंबर एक स्थान लाने वाले शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की जान चली गई है और 100 से अधिक लोग भर्ती हैं।

जांच में पता चला कि पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने वाले पानी की पाइपलाइन के ठीक ऊपर जरूरी सेफ्टी टैंक के बिना बनाए गए शौचालय के कारण सीवेज पीने के पानी में मिल गया।

कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे भागीरथपुरा क्षेत्र

इस मामले ने तूल पकड़ा तो बीजेपी के कई नेता इलाके के लोगों से मिलने आने लगे। इसी दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र पहुंचे।

यहां एक पत्रकार ने उनसे जब पीड़ितों की परेशानी को लेकर सवाल किए तो वह भड़क गए और शब्दों की मर्यादा को लांघ गए। हालांकि मामला बढ़ जाने के बाद उन्होंने अपने बयान के लिए अपने एक्स हैंडल से खेद जताया। मीडिया से बाद करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कुछ सवालों के जवाब दिए, लेकिन जब एक पत्रकार ने उनसे पीड़ितों के भुगतान न मिलने को लेकर सवाल किए तो वह भड़क गए और बोले फोकट के प्रश्न मत करो।

फोकट प्रश्न मत पूछो- कैलाश विजयवर्गीय

पत्रकार ने पूछा कि कैलाश जी भागीरथपुरा क्षेत्र के बहुत सारे मरीजों को बिल का भुगतान नहीं मिला है, जो कहा गया था कि रिफंड किया जाएगा और इलाके के लोगों के लिए पीने के पानी की ठीक व्यवस्था नहीं की गई है। इस पर नाराज हो गए और बोले,”अरे छोड़ो यार तुम फोकट प्रश्न मत पूछो, जब पत्रकार ने कहा कि मैं वहां होकर आया हूं तो मंत्री बोले क्या घंटा होकर आए हो तुम”

फिर पत्रकार ने उनसे कहा कि कैलाश जी आप ढंग से बात नहीं कर रहे तो मंत्री ने कहा,”मैं ढंग से बात कर रहा हूं” इसके बाद पत्रकार और मंत्री के बीच गहमागहमी बढ़ गई।

कैलाश विजयवर्गीय ने अपने एक्स जताया खेद

घटना के थोड़ी देर बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने एक्स पर पोस्ट कर खेद प्रकट किया। उन्होंने अपने एक्स के एक पोस्ट में लिखा,”मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटे हुए हैं। दूषित पानी से लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए, इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ। लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूँगा।”

सात लोगों की हुई मौत

बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 149 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, इनमें से 36 लोगों को डिस्चार्ज कर दिया है और अभी भी 116 लोगों का इलाज चल रहा है।

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मामले में की गई कार्रवाई

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार ने कहा, “जांच में हमने पाया कि पाइपलाइन के पास शौचालय निर्माण के दौरान कोई सेफ्टी टैंक नहीं बनाया गया। हम अन्य खामियों की भी जांच कर रहे हैं।”

मामले पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने वाटर सप्लाई असिस्टेंट इंजीनियर (एई) और जोनल ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया है, वहीं, सब-इंजीनियर को कार्यमुक्त कर दिया है।

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