29 जनवरी को पीएलएफआई के साथ पुलिस मुठभेड़ में 5 उग्रवादियों का एनकाउंटर किया गया था। ऐसे में इस एनकाउंटर पर अब सवाल उठने लगे हैं। बता दें कि चार उग्रवादियों की शिनाख्त के बाद पांचवे उग्रवादी की शिनाख्त करने वाले परिजनों का दावा है कि वो चौथी कक्षा का छात्र है लेकिन वहीं इस मामले पर पुलिस का कहना है कि ये सभी दावे फर्जी हैं।
परिजनों का क्या है कहना: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक 29 जनवरी को हुई मुठभेड़ में पांचवे शख्स के परिवार का कहना है कि उसका नाम संत थॉमस सोय था। उसकी उम्र दस साल थी जो मुरहू के एक स्कूल में कक्षा चौथी का छात्र था। थॉमस के परिजनों का कहना है कि वो 21 जनवरी से घर नहीं लौटा था। वहीं इस दौरान परिजनों ने थॉमस का आधार कार्ड भी दिखाया। लेकिन इस पूरे मामले पर एडीजी आशीष बत्रा व खूंटी एसपी आलोक का दावा है कि मारा गया उग्रवादी 18-20 साल का है और जो आधार कार्ड दिखाया जा रहै वो फर्जी है।
क्यो बोले आईजी एसटीएफ आशीष बत्रा: आईजी एसटीएफ आशीष बत्रा का कहना है कि मेरी जानकारी में जो उग्रवादी मारा गया है उसकी उम्र 18-20 वर्ष है तो वो चौथी क्लास का छात्र कैसे हो सकता है। जो आधार कार्ड दिखाया जा रहा है वो फर्जी है।
खूंटी के एसपी आलोक का क्या है कहना: इस पूरे मामले पर खूंटी के एसपी आलोक का कहना है कि जो मारे गए वो सभी बालिग थे। किसी की भी शारीरिक ढांचे से नहीं लगता कि कोई दस साल का था। फिर भी हम जांच करवा रहे हैं। रातभर पहाड़ी पर कार्रवाई हुई, वहां बच्चा क्या कर रहा था।
दूसरे आरोपी की मंगेतर का क्या है कहना: वहीं इस मुठभेड़ में मारे गए 16 वर्षीय संजय ओड़ेया की मंगेतर का आरोप है कि संजय खुद पुलिस का मुखबिर था। 28 जनवरी को संजय ने उसे बताया कि एएसपी ने कहा कि हर महीने तुम्हे 6 हजार रुपए मिलेंगे अगर उग्रवादियों को पकड़वाओगे। इसके साथ ही संजय की मंगेतर ने बताया कि पुलिस ने संजय को जीपीएस भी दिया था। वहीं इस मामले में पुलिस का कहना है कि ये पुलिस को बदनाम करने की साजिश है।

