पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को झारखंड के पलामू पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 45 साल से अधूरे पड़े मंडल डैम सहित छह परियोजनाओं की नींव रखी। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पांच लाभार्थियों को घर की चाबी सौंपी। इस योजना के तहत कुल 25 हजार लोगों को मकान मिले हैं। इस दौरान पीएम ने जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस व राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा।

कांग्रेस पर बोला हमला : पीएम मोदी ने कहा, ‘‘किसानों को सशक्त करने के लिए पिछली सरकारों को जिन योजनाओं पर काम करना चाहिए था, उनका क्या रवैया रहा? उसकी गवाही यह अधूरा पड़ा मंडल डैम दे रहा है। 47 साल यानी आधी सदी तक एक परियोजना अधूरी पड़ी रही। पूरे झारखंड में 40 साल से 99 प्रोजेक्ट अटके हुए हैं, जिन्हें अब पूरा किया जा रहा है। कांग्रेस ने किसानों को कर्जदार बना दिया। अब कुछ लोग कर्जमाफी के नाम पर किसानों को दोबारा बहकाने में लगे हुए हैं। कांग्रेस ने सिर्फ नाम पर ध्यान दिया है, जबकि बीजेपी सिर्फ काम पर ध्यान देती है। हम किसानों को अन्नदाता मानते हैं और किसानों की सेवा ही हमारा धर्म है।’’

19,604 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की मिलेगी सुविधा : पीएम मोदी की जनसभा से पहले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को तैयारियों का जायजा लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘मंडल डैम से पलामू और गढ़वा जिले के 19,604 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इस योजना के पूरा होने के बाद यहां के किसान साल में एक नहीं, दो-तीन फसल ले सकेंगे।’’

मंडल डैम। फोटो सोर्स : जनसत्ता ऑनलाइन

1972 में रखी गई थी मंडल डैम की आधारशिला : बता दें कि एकीकृत बिहार के समय 1972 में मंडल डैम परियोजना शुरू की गई थी। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय ने इस डैम की आधारशिला रखी थी। तय था कि 1972 से लेकर 1977 तक यह काम पूरा हो जाएगा, लेकिन यह परियोजना अब तक अंजाम पर नहीं पहुंच सकी। अब 45 वर्ष बाद इस परियोना का काम दोबारा शुरू हुआ है। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी। झारखंड सरकार का दावा है कि मंडल परियोजना से पलामू, गढ़वा के साथ-साथ बिहार के औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल के किसानों को सहूलियत होगी। वहीं, पनबिजली परियोजना से 24 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका सीधा लाभ पलामू प्रमंडल के तीनों जिले को मिलेगा।

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अधीक्षण अभियंता की हत्या के बाद रुक गया था काम : 1993 में मंडल व उसके आसपास के इलाकों में नक्सलवाद चरम पर था। उस दौरान नक्सलियों ने मंडल डैम परियोजना के अधीक्षण अभियंता वैजनाथ मिश्र की हत्या कर दी थी, जिसके बाद काम रुक गया। वहीं, इस योजना पर वन विभाग को भी आपत्ति थी, जो परियोजना के दोबारा शुरू नहीं होने भी कारण बना।

300 करोड़ था शुरुआती बजट, अब खर्च होंगे 1622 करोड़ रुपए : 47 साल पहले 1972 में मंडल डैम की नींव रखी गई थी। उस वक्त इस परियोजना का अनुमानित बजट 300 करोड़ रुपए था, जो 1985 में 439 करोड़ रुपए हो गया। योजना आयोग ने इस परियोजना को 1989 में मंजूरी दी, जिसके बाद परियोजना का बजट बढ़कर 581 करोड़ रुपए हो गया था। अब इस पर 1622 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।