जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल ने गुरुवार को कहा कि इतिहास का पहिया उल्टा नहीं चलता है। घाटी में फल उत्पादकों के लिये मार्केट इंटरवेंशन स्कीम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि राज्य को पहले वाला विशेष दर्जा देने की संभावना नहीं है। कहा कि केंद्र सरकार यहां के लोगों के हित का पूरा ध्यान रखेगी, आप जो चाहेंगे वह मिलेगा। लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। आज यहां के लोगों के प्रति दिल्ली के पास बहुत सहानुभूति है। पूरा देश आपके साथ है। आपको हर चीज मिलेगी। चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
बताया कि भारत में कुल सेब उत्पादन का 75 फीसदी हिस्सा कश्मीर में होता है। घाटी में आठ हजार करोड़ रुपये का 30 लाख मीट्रिक टन फल उत्पादन होता है। फल उत्पादकों को परेशान करने और धमकाने पर आतंकियों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपना रवैया तत्काल बदल लें, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम अपने किसानों और खरीदारों को समुचित सुरक्षा उपलब्ध कराएंगे।

44 हजार लैंडलाइन कनेक्शन बहाल, मोबाइल-इंटरनेट अब भी ठप: शाम को श्रीनगर में सरकारी प्रवक्ता रोहित कंसल ने मीडिया को जानकारी दी कि पाकिस्तान से लगातार उकसावे की कार्रवाई से घाटी में संचार सुविधा बहाली में बाधा आ रही है। उनका यह बयान जम्मू और कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वाइस कॉल्स में ढील देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कंसल ने कहा कि सरकार संचार सुविधाओं पर से प्रतिबंध जल्द से जल्द हटाने के लिये लगातार प्रयास कर रही है।

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पांच अगस्त से ठप हैं संचार सुविधाएं : पिछले महीने की पांच तारीख को सरकार ने घाटी में मोबाइल फोन्स, फिक्स्ड लाइन फोन और इंटरनेट सेवाओं समेत सभी प्रकार के संचार पर प्रतिबंध लगा दिया था। फिलहाल 44 हजार लैंडलाइन कनेक्शन फिर बहाल कर दिए गए हैं, लेकिन मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं। अधिकारियों के मुताबिक घाटी में 50 लाख कनेक्शन हैं।

व्यापारियों का 16 को जम्मू बंद रखने का आह्वान : जम्मू के व्यापारियों, उद्योगपतियों, ट्रांसपोर्टर्स और किसान संगठनों ने गुरुवार को संयुक्त रूप से 16 सितंबर को जम्मू बंद रखने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाने के दौरान सरकार के स्वेच्छाचारी और अड़ियल रवैए ने सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साथ आने और आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश किया है।

जम्मू के कई संगठनों का समर्थन  : जम्मू चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन, दी चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन और दी जम्मू और कश्मीर किसान काउंसिल इस हड़ताल में शामिल हैं। इन संगठनों के नेताओं ने हाल ही में लगाए गए लेवी टैक्सों को वापस लेने में देरी करने पर चिंता जताई। इसमें वन टाइम मोटर वेहीकल्स पर बढ़े दर और आईटी-जीएसटी रिटर्न्स फाइलिंग की तारीखें बढ़ाने के मुद्दे भी शामिल हैं। लगातार भ्रष्टाचार और मूलभूत सुविधाओं मे कमी पर भी नाराजगी जताई गई है।