अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों और ईरान में इंटरनेट सेवाओं के पूरी तरह ठप होने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक जगत में हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच अब ईरान में संचार माध्यमों के बंद होने से स्थानीय निर्यातकों का कारोबार बुरी तरह चरमरा गया है। विशेष रूप से सूखा मेवा, बासमती चावल, मसाले और रेडीमेड कपड़े के क्षेत्र में कार्यरत कारोबारियों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि न तो नए आर्डर मिल पा रहे हैं और न ही पुराने भुगतानों का रास्ता साफ हो पा रहा है।

आइआइए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-10, 63 और 88 सहित ग्रेटर नोएडा की निर्यात इकाइयों से ईरान को बड़े पैमाने पर माल भेजा जाता है। वहीं कपड़ा निर्यातक अभय कुमार बताते हैं कि पहले ही दुबई के माध्यम से होने वाली बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेजों का काम अमेरिकी सख्ती के कारण जटिल बना हुआ था, लेकिन अब इंटरनेट के अभाव में यह पूरी तरह ठप हो गया है।

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निर्यातकों का कहना है कि ईमेल और आनलाइन सत्यापन बंद होने से वहां के आयातकों से संपर्क करना असंभव हो गया है, जिसके चलते करोड़ों रुपए का लेनदेन अधर में लटका है। वस्त्र निर्यातक दीप भूटानी बताते हैं कि स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान में जारी अस्थिरता को देखते हुए मुंबई पोर्ट पर कई कंटेनरों को रोक दिया गया है, जिन्हें आगे भेजने की अनुमति नहीं मिल रही है।

इस संकट का सीधा असर अब स्थानीय बाजारों पर भी पड़ने लगा है। सूखे मेवे के व्यापारियों का मानना है कि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने और भुगतानों में देरी के कारण आने वाले दिनों में सूखे मेवों की कीमतों में भारी उछाल आना तय है। इससे पहले भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान निर्यातकों को घाटा उठाना पड़ा था, लेकिन मौजूदा इंटरनेट ब्लैकआउट ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है।

इन हालातों को देखते हुए स्थानीय उद्यमी अब सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं, ताकि वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों के माध्यम से व्यापार को सुरक्षा प्रदान की जा सके और भारतीय उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश की जा सके।