मुंबई के कांदिवली में एक आवासीय सोसाइटी में कुछ लोगों द्वारा टीकाकरण में ‘धोखाधड़ी’ किए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। अब तक की जांच के मुताबिक, यहां नकली वैक्सिनेशन अभियान में लोगों को वैक्सीन की जगह नमक के पानी (सैलाइन वॉटर) की डोज देने की बात सामने आई है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि स्कैम का शिकार हुए इन सभी लोगों का एंटीबॉडी टेस्ट किया जाएगा, जिसके बाद इन्हें कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज दी जाएंगी।
बता दें कि एक डॉक्टर समेत कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने खुद को एक निजी अस्पताल का प्रतिनिधि बताकर सोसाइटी के सदस्यों के लिये कोविड-19 टीकाकरण शिविर का आयोजन किया था। सोसाइटी के सदस्यों ने कहा था कि उन्हें जो टीके लगाए गए नकली हो सकते हैं। पुलिस से शिकायत में बताया गया था कि को-विन पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले लोगों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था और उन्हें विभिन्न अस्पतालों के नाम पर प्रमाण पत्र प्राप्त हुए हैं। इस शिविर में कुल 390 सदस्यों को 1260 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से टीके दिए गए थे।
अब तक 10 लोगों की हुई गिरफ्तारी: महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, मुंबई में ऐसे फर्जी टीकाकरण अभियान की जद में 2040 लोग आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनने में 28-30 दिन का समय लगता है। इसके चलते जुलाई के पहले हफ्ते में सरकार इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए लोगों का एंटीबॉडी टेस्ट करेगी।
इस टेस्ट के बाद राज्य सरकार केंद्र को भी जानकारी देगी और सभी लोगों के लिए टीका सुनिश्चित करवाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस और बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन इस मामले में जांच कर रही हैं। अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और आरोपियों पर केस दर्ज किए गए हैं।
कैसे हुआ टीकाकरण में फर्जीवाड़ा?: राजेश टोपे ने बताया कि सभी लोगों को पहली डोज लगने के सर्टिफिकेट मिले हैं, लेकिन जांच के मुताबिक, उन्हें सैलाइन वॉटर दिए जाने का शक है। आरोपी गैंग ने वैक्सीन की शीशियां दूसरे राज्य से जुटाईं और उनमें नमक का पानी भरा। कांदिवली की सोसाइटी में रहने वाले लोगों को वैक्सीन के नाम पर यही नमक का पानी दे दिया गया। हालांकि, सुकून की बात यह रही कि जिन लोगों ने फर्जी टीकाकरण अभियान में हिस्सा लिया था, उनमें से किसी को भी बुखार या शरीर में दर्द जैसी समस्या नहीं आई।
