इलियास आजमी ने आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो गया है और यह एक व्यक्ति की पार्टी बनकर रह गई है। आजमी ने पार्टी पर मुसलमान विरोधी होने का भी आरोप लगाया। हालांकि आजमी ने अपनी भावी रणनीति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ेंगे। गौरतलब है कि आजमी को हाल ही में पार्टी के राजनीतिक मामलों की नवगठित समिति से बाहर रखा गया।
जनसत्ता से बातचीत में इलियास आजमी ने कहा, ‘मुल्क जिस रास्ते पर जा रहा है उसका विकल्प आम आदमी पार्टी के रूप में संभव नहीं है। मैंने बसपा छोड़कर आप का दामन थामा था क्योंकि बसपा एक व्यक्ति की पार्टी थी जो मेरी राजनीतिक भावना के अनुरूप नहीं थी, लेकिन आप भी वैसी ही पार्टी बनकर रह गई है। पार्टी के भीतर लोकतंत्र खत्म हो गया है।’ भावी रणनीति पर आजमी ने कहा कि फासीवाद के खिलाफ अगर कोई विकल्प नजर आएगा तो वह जरूर उससे जुड़ेंगे, जहां सभी जाति-समुदाय वर्ग को जगह मिले।
योगेंद्र यादव के स्वराज अभियान से जुड़ने के सवाल पर आजमी ने कहा कि वे अच्छे लोग हैं, पुराने साथी हैं। आजमी ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की भी तारीफ की। हाल ही में संपन्न आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक से भी इलियास आजमी गैर-हाजिर रहे। राष्ट्रीय परिषद द्वारा नवगठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने 10 सदस्यीय राजनीतिक मामलों की समिति (पैक) का गठन किया जिससे इलियास आजमी को बाहर रखा गया। इसके पहले की समिति में आजमी शामिल थे। इस मुद्दे पर नाराजगी की बात से आजमी ने इनकार किया और कहा कि वह दिल्ली में मौजूद थे लेकिन उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि वह काफी समय से विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
आजमी ने कहा वह पिछले 4-5 महीने से लोगों से मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं कि समाज को फासीवाद के रास्ते पर जाने से बचाया जाए। वह पूर्व में भी जेपी आंदोलन, वीपी सिंह के आंदोलन और अण्णा आंदोलन में शामिल होकर भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे हैं। आजमी ने कहा कि देश के मुसलमानों ने हमेशा देश की रक्षा की है और आगे भी करते रहेंगे। उत्तर प्रदेश से आने वाले इलियास आजमी वरिष्ठ राजनेता हैं और वह बसपा से दो बार सांसद रह चुके हैं। वह पहले भी आप में आंतरिक लोकतंत्र के अभाव का आरोप लगाते रहे हैं। आप से बड़े चेहरों के अलग होने का सिलसिला जारी है। पिछले साल मार्च में पार्टी के संस्थापक चेहरों में से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने पार्टी छोड़ी थी। पंजाब से चयनित दो सांसद भी पार्टी के मुद्दों पर साथ नहीं है।

