उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बृहस्पतिवार को बड़ा ऐलान किया है। रावत ने कहा है कि अब वह चुनाव नहीं लड़ेंगे तथा चुनाव लड़वाने पर फोकस करेंगे ताकि 2027 में कांग्रेस की जीत तय हो सके।
उत्तराखंड में फरवरी, 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राज्य में सरकार चला रही बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है।
हरीश रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह 2022 का विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ना चाहते थे लेकिन इस बार उन्होंने तय कर लिया है कि अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
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करो या मरो का होगा चुनाव
अगला विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा, ‘‘मैं तो कह चुका हूं कि चुनाव लड़ाऊंगा। 2027 का विधानसभा करो या मरो का चुनाव होगा, यानी जीतो या खत्म हो जाओ। हम लगातार तीसरी बार किसी कीमत पर चुनाव नहीं हारना चाहते। इसलिए मैं चुनाव जिताने के लिए काम करूंगा।’’
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं 2022 में भी चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, उस समय मना किया था। इस बार तो दृढ़ता से कहा है कि मैं चुनाव लड़ाऊंगा। महत्वपूर्ण है कि हम (70 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में) 40 की संख्या तक पहुंचें और सरकार बनाएं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या उनके चुनाव नहीं लड़ने से जनता में कांग्रेस के खिलाफ गलत संदेश नहीं जाएगा तो रावत ने कहा, ‘‘मैंने 2002 का चुनाव नहीं लड़ा था तथा सारे प्रचार अभियान का समन्वय किया था और हम जीत गए थे। 2007 में नहीं लड़ा था, तो हमने बहुत अच्छी टक्कर दी। 2012 में नहीं लड़ा था, सारा प्रचार अभियान चलाया और हम जीत गए।’’
सीएम पद की दावेदारी को लेकर क्या बोले?
रावत ने कहा, ‘‘हमारे यहां प्रचार के लिए कोई चेहरा चाहिए। आज भी चेहरे के सामने चेहरे वाले चुनाव अभियान का बड़ा महत्व है।’’ रावत ने मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी से जुड़े सवाल पर कहा कि कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद के लिए चयन की एक प्रक्रिया है।
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लालकुआं सीट से हार गए थे रावत
हरीश रावत 2022 का विधानसभा चुनाव कुमाऊं की लालकुआं सीट से लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। रावत ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कहा कि इस मामले में जो नए तथ्य सामने आए हैं, उसको देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले में कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की गई है ताकि भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए जरूरी है कि एसआईआर निष्पक्ष तरीके से हो।
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