गुजरात में कांग्रेस को विधान सभा चुनावों से पहले हालिया होने वाले राज्य सभा चुनावों में झटके पर झटका लग रहा है। वहां अब तक कुल सात कांग्रेस विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। माना जा रहा है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा क्योंकि चार और विधायकों के इस्तीफा देने का संदेह है। बता दें कि गुरुवार को तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था उसके बाद शुक्रवार (28 जुलाई) को भी चार और विधायकों ने इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस विधायक मान सिंह चौहान और छानाभाई चौधरी ने शुक्रवार (28 जुलाई) को विधान सभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया। साल 1990 से 1995 के बीच कांग्रेस की सरकार में चौहान परिवहन मंत्री थे। दोपहर होते-होते गोधरा के विधायक सी के रौली और थासरा के विधायक राम सिंह परमार ने भी अपना इस्तीफा विधान सभा स्पीकर को सौंप दिया। परमार खेड़ा की अमूल डेयरी के चेयरमैन हैं।

कांग्रेस के इन विधायकों के इस्तीफे से सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल के राज्य सभा में पहुंचने की कोशिश को झटका लग सकता है। राज्य में आठ अगस्त को संसद के ऊपरी सदन के लिए चुनाव होना है। 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या अब 50 रह गई है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 47 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। अगर चार और विधायकों ने पार्टी छोड़ी तो अहमद पटेल का संसद पहुंचना मुश्किल होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि कांग्रेस विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को एनसीपी के दो और जदयू के एक विधायक का समर्थन हासिल है। बावजूद इसके क्रॉस वोटिंग का भी खतरा है। हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव में ऐसा हो चुका है। कांग्रेस के 57 विधायक होने के बावजूद मीरा कुमार के समर्थन में सिर्फ 49 वोट पड़े थे।

शंकर सिंह बाघेला के करीबी तीन विधायकों ने गुरुवार को इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इनमें से एक को भाजपा ने तुरंत अहमद पटेल के खिलाफ राज्य सभा चुनाव में अपना प्रत्याशी बना दिया। इन तीन विधायकों में कांग्रेस के चीफ व्हिप बलवंत सिंह राजपूत, तेजश्रीबेन पटेल और प्रहलाद पटेल शामिल हैं।