फर्जी डिग्री के आधार पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के बौद्ध विभाग में दाखिला लेने के आरोपों के चलते गुरुवार को विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) अध्यक्ष अंकिव बसोया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी छात्र (एबीवीपी) ने ऐसा करने को कहा था। परिषद ने अंकिव को जांच पूरी होने तक संगठन से निलंबित भी कर दिया है। अन्य छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि डीयू प्रशासन और एबीवीपी के गठजोड़ के चलते अंकिव का इस्तीफा छात्र संघ चुनाव परिणाम आने के दो महीने बाद हो पाया है। जानकारों के मुताबिक यह पहला मामला है जबकि किसी डूसू अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा है। एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी के मुताबिक डूसू अध्यक्ष अंकिव बसोया पर उनकी डिग्री के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों के देखते हुए संगठन ने उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने को कहा है। इतना ही नहीं, मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें एबीवीपी के समस्त दायित्वों से निवृत्त करते हुए एबीवीपी से निलंबित कर दिया है।
दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक लारैब अहमद नियाजी का कहना है कि अंकिव के इस्तीफा से यह साबित हो गया कि डीयू प्रशासन और एबीवीपी 60 दिन पूरे होने का इंतजार कर रहे थे। नियाजी ने बताया कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों के लिए लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक चुनाव परिणाम जारी होने के बाद 60 दिन बाद यदि कोई पदाधिकारी इस्तीफा देता है तो उस स्थिति में दोबारा चुनाव नहीं कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आज एक फर्जी अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि हम पहले दिन से ही कर रहे थे कि अंकिव की डिग्री फर्जी है और इस बात को लेकर हम डीयू के रजिस्ट्रार तरुण दास, छात्र कल्याण डीन, बौद्ध विभाग के डीन और यहां तक कोर्ट भी गए लेकिन हमारी एक नहीं सुनी गई। नियाजी ने दावा किया कि अगर दोबारा चुनाव होते तो डीयू के छात्र एबीवीपी को बुरी तरह से हराते। आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिशएन डीयू की सचिव मधुरिमा कुंडू ने कहा कि अंकिव को एबीवीपी से बर्खास्त करने का निर्णय बहुत देरी से लिया गया है जबकि दोबारा चुनाव का समय निकल गया है।
अब यह साफ हो गया है कि एबीवीपी अंकिव की धोखाधड़ी को छिपाने का काम कर रही थी। अंकिव सितंबर में डूसू के अध्यक्ष चुने गए थे। परिणाम आने के बाद से ही एनएसयूआइ सहित अन्य छात्र संगठन अंकिव की डिग्री और डीयू में उसके प्रवेश पर सवाल उठा रहे थे। अंकिव ने तमिलनाडु के थिरुवल्लूवर विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री के आधार पर डीयू में दाखिला लिया था। थिरुवल्लूवर विवि की ओर से मीडिया में कई बार कहा गया कि न अंकिव उनके कभी छात्र रहे हैं और न ही उनके द्वारा पेश किए जा रहे दस्तावेज विश्वविद्यालय से जारी हुए हैं। हालांकि डीयू अभी तक तमिलनाडु के इस विश्वविद्यालय से अंकिव की डिग्री को सत्यापित कराने में असमर्थ रहा है।
