उमा मिश्रा
राजधानी में मधुमेह और डायरिया जैसी बीमारियों से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली के अस्पतालों और डिस्पेंसरी से जुटाए गए आंकड़ों को देखें तो पिछले चार साल में डायरिया के 22 लाख 57 हजार 298 मरीज दर्ज किए गए हैं वहीं मधुमेह के मरीजों की संख्या 14 लाख 41 हजार 11 पाई गई है। उच्च रक्तचाप के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में इस रोग से ग्रसित मरीज 13 लाख 94 हजार 779 हैं। राजधानी में साल-दर-साल बीमारियों की चपेट में लाखों लोग आ रहे हैं लेकिन रोकथाम के लिए कोई खास कोशिश नहीं दिख रहा है। आरटीआइ की एक रिपोर्ट से यह जा नकारी सामने आई है। प्रजा फाउंडेशन ने इस रिपोर्ट को साझा किया है। 2015 में जल संबंधी शिकायत 27,227 से बढ़कर 2017 में 33,884 तक पहुंच गईदिल्ली में 94 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनका चिकित्सा बीमा नहीं हुआ है। चिकनगुनिया से 48584 पुरुष और 58660 महिलाएं पीड़ित पाए गए लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों का किया रुख है। दिल्ली सरकार भले ही अपने अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधा देने का दावा कर रही है लेकिन दिल्ली की जनता आज भी इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करते नजर आ रहे हैं।
2018 के आंकड़ों के मुताबिक, निजी अस्पतालों में मलेरिया के 62,242, डेंगू के 61,890 व चिकनगुनिया के 60,994 मरीज पहुंचे हैं। जबकि सरकारी डिस्पेंसरी व अस्पतालों में मलेरिया के 35,935, डेंगू के 3,644 व चिकनगुनिया के 28,622 मरीजों ने इलाज करवाया। दिल्ली में कुल 12 जोन हैं। इन जोन में कुल राज्य सरकार के अधीन 38 अस्पताल, नगर निगम के 6 अस्पताल, राज्य सरकार के अधीन 255 डिस्पेंसरी और नगर निगम के अधीन 77 डिस्पेंसरी मौजूद हैं।
एचआइवी/एड्स के घटे मरीज: पिछले साल की तुलना में एचआइवी/एड्स के मरीज जरूर घटे हैं। इसमें 2016-17 में 13 हजार 891 मरीज दर्ज किए गए थे, जबकि 2017-18 में 3 हजार 798 मरीज ही दर्ज किए गए हैं। डेंगू मरीजों की संख्या 2014-15 में जहां 668 थी वहीं 2017-18 में ये बढ़कर 7153 हो गई है।
उच्च रक्तचाप के मरीज
साल मामले
2014-15 3 लाख 37 हजार
2015-16 5 लाख 76 हजार
2016-17 3 लाख 59 हजार
2017-18 3 लाख 67 हजार
डायरिया के मरीज
2014-15 5 लाख 83 हजार
2015-16 5 लाख 76 हजार
2016-17 5 लाख 96 हजार
2017-18 5 लाख एक हजार 484
मधुमेह के मरीज
2014-15 3 लाख 39 हजार
2015-16 3 लाख 65 हजार
2016-17 3 लाख 73 हजार
2017-18 3 लाख 62 हजार
