दिल्ली के सियासी समर में इस बार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बीच बेहद दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है। लोकसभा की सात सीटों के चुनाव और कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा की 70 सीटों के चुनाव में भी इन दोनों सूरमाओं का शक्ति परीक्षण होना है। आम आदमी पार्टी (आप) से गठबंधन नहीं करने का एलान कर दिल्ली कांग्रेस की मुखिया बनीं दीक्षित के लिए करीब पांच साल पहले केजरीवाल के हाथों मिली करारी शिकस्त का हिसाब चुकाने का यह पहला मौका है। शायद यही वजह है कि 80 की उम्र में भी उन्होंने दिल्ली की गलियों में उतरकर भाजपा और ‘आप’ सरकारों के खिलाफ अलख जगाने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष दीक्षित ने कहा है कि वे पार्टी की ओर से आयोजित सभी जिला सम्मेलनों में शिरकत करेंगी और ब्लॉक स्तर पर आयोजित जलसों में भी हिस्सा लेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और दिल्ली दोनों ही सरकारों ने राजधानी के लोगों से वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया।

उन्होंने जिलाध्यक्षों से कहा है कि जहां-जहां बूथ स्तर समितियां नहीं बनी हैं, उन्हें दस दिन में पूरा किया जाए और हर जिले में सम्मेलन का आयोजन भी लगातार हो। शीला दीक्षित सरकार में अलग-अलग महकमों के मंत्री रहे और अब कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका में आए हारून यूसुफ का कहना है कि आज दिल्ली की जनता दीक्षित की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार और आम आदमी पार्टी सरकार की तुलना कर रही है। लोगों को दिख रहा है कि शीला दीक्षित ने दिल्ली को किस कदर चमकाया और अब अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली सरकार में किस तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं। ऐसे में जाहिर तौर पर चुनाव चाहे लोकसभा का हो या दिल्ली का, लोग तुलना तो करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की उपलब्धियां दिल्ली के साथ-साथ पूरा देश रहा है। किस तरह नोटबंदी से लेकर जीएसटी और रफाल विमान की खरीद में घपले हुए हैं। ऐसे में दिल्ली में कांग्रेस शीला दीक्षित की अगुआई में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों के खिलाफ अभियान छेड़ेगी।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि दीक्षित ने यह तय किया है कि उनकी अगुआई वाली सरकार की उपलब्धियां और केजरीवाल सरकार की कमियों की फेहरिस्त लेकर कांग्रेस के लोग जनता के बीच जाएंगे। खुद दीक्षित ऐसे जनसंपर्क अभियानों की अगुआई करेंगी। पानी, बिजली, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि तमाम मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को घेरा जाएगा। दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री व ‘आप’ के मुखिया अरविंद केजरीवाल की अगुआई में उनकी पार्टी ने भी घर-घर घूमकर जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। कोलकाता में हुई तृणमूल कांग्रेस की रैली के बाद केजरीवाल खुद दिल्ली में बड़ी रैली करने की तैयारी में है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी मैदान में दिल्ली के इन दो महारथियों का मुकाबला वाकई जोरदार होगा।