दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर तल्खी में और इजाफा उस वक्त देखा गया जब उन्होंने कहा  कि क्या ऐसे प्रधान मंत्री के हाथों में देश का लोकतंत्र सुरक्षित है? केजरीवाल ने शनिवार (16 जून) को ट्वीट कर कहा, ”जो प्रधानमंत्री किसी राज्य में अफसरों की हड़ताल करवा के वहां का काम काज ठप करता है, क्या ऐसे प्रधानमंत्री के हाथों में देश का लोकतंत्र सुरक्षित है?” केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के तीन सहयोगियों का उपराज्यपाल निवास पर धरना शनिवार को भी जारी रहा। आम आदमी पार्टी (आप) रविवार (17 जून) को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने की तैयारी में है, क्योंकि दिल्ली में जारी भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों की हड़ताल को लेकर सरकार में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता पंकज गुप्ता ने कहा, “दिल्ली उसी तरह का जनांदोलन शुरू करने जा रही है, जैसा कि हमने पहले किया था और दिल्ली की राजनीतिक तस्वीर बदल गई।” केजरीवाल और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को पूरा यकीन है कि आम जनता भी मार्च में हिस्सा लेगी।

इससे पहले केजरीवाल ने कहा कि आईएएस अधिकारी दबाव में हैं और उनकी हड़ताल भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) से प्रेरित है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी उनका रुख स्पष्ट करने को कहा कि क्या वह बीजेपी के साथ हैं या दिल्ली की जनता के साथ। केजरीवाल ने इस बात की भी दुहाई दी कि उनकी सरकार के पास उतना अधिकार नहीं है, जितना पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पास था। केजरीवाल ने कहा, “मेरे पास एक चपरासी का भी तबादला करने की शक्ति नहीं है, लेकिन दीक्षित के पास अधिकारियों का दबादला करने और भ्रष्टाचार के आरोपों में उनकी गिरफ्तारी भी करवाने की शक्ति थी।”

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन और गोपाल राय के साथ केजरीवाल राज निवास में सोमवार शाम से धरने पर बैठे हैं। सिसोदिया और जैन क्रमश: चार और पांच दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं। केजरीवाल ने कहा, “हम यहां छह दिनों से बैठे हैं। हम असहाय बैठे हैं, आईएएस अधिकारी दिल्ली में पिछले तीन महीने से हड़ताल पर हैं। वे फाइलों का निपटारा करने के लिए दफ्तर आते हैं, मगर किसी आधिकारिक बैठक में हिस्सा नहीं लेते हैं।” उन्होंने कहा, “वे फोन नहीं उठाते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में भी हमारे संदेशों का जवाब नहीं देते हैं। वे मंत्रियों के साथ कार्यक्षेत्र के निरीक्षण पर नहीं आते हैं। कोई सरकार इस तरह से नहीं चल सकती है। हम यहां हड़ताल खत्म करवाने के लिए बैठे हैं।”