मानवाधिकारों (Human Rights) पर एक वाद-विवाद प्रतियोगिता के दौरान सीआरपीएफ की एक महिला कॉन्स्टेबल ने ऐसा बयान दे डाला जिस पर बवाल मच गया। अब सीआरपीएफ ने भी अपनी कॉन्स्टेबल के बयान को खारिज कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि सुरक्षा बल मानवाधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं। दरअसल एक महिला कॉन्स्टेबल का वीडियो सामने आया था जिसमें उसने कहा था, ‘वो कोख नहीं पलने देंगे, जिससे अफजल निकलेगा।’
ये था कॉन्स्टेबल का बयानः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की तरफ से आयोजित इस बहस में महिला कॉन्स्टेबल ने कहा था, ‘उस कोख को पहले ही खत्म कर दिया जाना चाहिए जिससे अफजल गुरु (2001 में संसद पर आतंकी हमला करने वाला आतंकी) पैदा होता है और कन्हैया कुमार (जेएनयू के पूर्व छात्र नेता) के दिल में छेद कर तिरंगा लगा देना चाहिए।’
सीआरपीएफ ने दिया बयानः 27 सितंबर को हुई इस बहस में दिया गया खूशबू चौहान का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस बयान की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ कड़ी निंदा कर रहे हैं। शनिवार (5 अक्टूबर) को सीआरपीएफ ने चौहान के बयान को खारिज कर दिया। सीआरपीएफ ने कहा, ‘हम मानवाधिकारों का बिना किसी शर्त के पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने बेहतरीन भाषण दिया लेकिन कुछ हिस्सा हटाया जाना चाहिए।’
कॉन्स्टेबल ने जीता सांत्वना पुरस्कारः चौहान को इस प्रतिस्पर्धा में सांत्वना पुरस्कार मिला था। इस ज्यूरी का नेतृत्व एनएचआरसी के सचिव जनरल जयदीप गोविंद कर रहे थे, वहीं अन्य सदस्यों में आयोग के पूर्व डीजी सुनील कृष्णा, प्रोफेसर जीएस वाजपेयी, जस्टिस पीसी पंत भी शामिल थे। इस वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय ‘क्या मानवाधिकारों का ध्यान रखते हुए देश में आतंक से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है?’
