बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने झारखंड में भी पूर्ण शराबबंदी लागू करने की बात दोहराते हुए शनिवार (7 सितंबर) को यहां कहा कि यह कितनी खराब बात है कि बिहार में जो लोग शराब पीना चाहते हैं वे लोग शराब पीने के लिए झारखंड आते हैं। रांची में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में भी पूर्ण शराबबंदी लागू होना चाहिए। इससे समाज की अनेक कुरीतियां समाप्त हो जाती हैं और सामाजिक तानाबाना स्वस्थ और मजबूत होता है।

राज्य में हो पूर्ण शरबबंदीः उन्होंने झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी पार्टी की राज्य इकाई को जोश से भरते हुए कहा कि उसे जनता के बीच में शराबबंदी के मुद्दे को जोरशोर से ले जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा की सरकार और मुख्यमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी की आवश्यकता है अन्यथा यह बड़ा ही अशोभनीय है कि बिहार में शराब की लत वाले लोग शराब पीने के लिए झारखंड का रुख करते हैं।

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मुख्यमंत्री ने साझा किए तीन मंत्रः उन्होंने झारखंड के विकास के लिए पांच मंत्र दिए। पहला सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ न हो, दूसरा पूर्ण शराबबंदी लागू करना, तीसरा क्षेत्रीय विकास (मंडलवार) की रणनीति बनाना, चौथा पिछड़ों एवं अति पिछड़ों को 27 फीसद आरक्षण देने की व्यवस्था करना और अल्पसंख्यकों के विकास पर तेजी से काम करना।
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बता दें कि अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 के मुताबिक, किसी के पास शराब मिलने पर कड़ी सजा का प्रावधान था। वहीं अगर कोई व्यक्ति शराब की तस्करी करने में महिला या 18 साल से कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल करता है तो उसे कम से दस साल और अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।