’नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते भाजपा तलाला सीट 2007 और 2012 के चुनाव में भी नहीं जीत पाई थी।
’इस बार गोविंद परमार ने बराड़ को 2440 वोट से हरा कर कांग्रेस से यह सीट छीन ली।
’तलाला उपचुनाव का नतीजा आनंदी बेन के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।
तलाला विधानसभा सीट को कांग्रेस से छीन कर गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने अपनी धमक दिखाई है। पटेल पिछले हफ्ते दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली थीं तो उनको मुख्यमंत्री पद से हटा कर राज्यपाल बनाए जाने की अटकलें तेज हो गईं थी। हालांकि मीडिया की इस खबर का चौबीस घंटे के भीतर ही आनंदी बेन ने खंडन भी कर दिया था। मजे की बात तो यह है कि तलाला सीट भाजपा नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते 2007 और 2012 के चुनाव में भी नहीं जीत पाई थी।
नए बने गिर-सोमनाथ जिले की तलाला विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत पिछले आम चुनाव के विजयी कांग्रेसी नेती जसु बराड़ की जनवरी में मृत्यु के कारण आई थी। कांग्रेस ने बराड़ के छोटे भाई भगवानजी बराड़ को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा ने गोविंद परमार को मैदान में उतारा था। 16 मई को उपचुनाव में करीब 63 फीसद मतदान हुआ था। गुरुवार को नतीजा भाजपा के पक्ष में आया
और परमार ने बराड़ को 2440 वोट से हरा कर कांग्रेस से यह सीट छीन ली। इस उपचुनाव को लेकर तमाम तरह की अटकलें लग रही थीं। इस इलाके में पटेल मतदाताओं की खासी तादाद है। आनंदी बेन को हटाए जाने की खबरों के पीछे भी वजह हार्दिक पटेल के आंदोलन के चलते पटेल समुदाय की भाजपा से नाराजगी बढ़ना बताई गई थी। पर तलाला की जीत के बाद गुजरात भाजपा अध्यक्ष विजय रूपाणी ने दावा किया कि उपचुनाव के नतीजे ने दिखा दिया कि पटेल अभी भी भाजपा के साथ ही हैं।
आनंदी बेन को हटा कर नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना के पीछे एक कारण आनंदी बेन की उम्र को बताया गया था। दरअसल नरेंद्र मोदी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद यह आम धारणा बनी थी कि वे 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को सरकार में पद देने के बजाए राज्यपाल बनाए जाने के हामी हैं। इसी कसौटी पर आनंदी बेन को हटाने की बात फैली। हालांकि मुख्यमंत्री के समर्थक एक विधायक का तर्क था कि आनंदी बेन पटेल से ज्यादा उम्र वाले नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। ऐसे में केवल आनंदी बेन के लिए उम्र का आधार लागू कैसे हो सकता है?
इस बीच एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आनंदी बेन ने नितिन पटेल की मौजूदगी में अपने विरोधियों को यह कह कर हैरान कर दिया कि वे भी गुजरात में ही रहेंगी और नितिन पटेल भी। बहरहाल तलाला उपचुनाव का नतीजा आनंदी बेन के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।
