शिवसेना कई बार सार्वजनिक मंच पर अपनी सहयोगी और सत्ताधारी पार्टी भाजपा की आलोचना कर चुकी है। एक बार हालात यहां तक खराब हो गए थे कि शिवसेना के एनडीए छोड़ने के कयास लगाए जाने लगे थे। हालांकि अब वह बीती बात हो गई है और यह लगभग तय हो गया है कि भाजपा और शिवसेना आगामी लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगी। वैसे अभी इस संबंध में आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। ऐसी खबरें हैं कि दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा भी हो गया है और एनबीटी की एक खबर के अनुसार, भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र में क्रमशः 25 और 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। दोनों पार्टियां आगामी विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ने पर लगभग सहमत हो गई हैं। हालांकि विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद पर पेंच फंसा हुआ है।
बता दें कि महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं, जिनमें से पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा ने महाराष्ट्र में 26 सीटों पर और शिवसेना ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें से भाजपा के खाते में 23 और शिवसेना के खाते में 18 सीटें गई थीं। बीते समय में दोनों पार्टियों के संबंधों में दरार देखने को मिली और लगा था कि 2019 के लोकसभा चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। लेकिन दोनों पार्टियों में साथ चुनाव लड़ने पर सहमति बन गई है। आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों पार्टियों का गठबंधन रहेगा। लेकिन विधानसभा चुनावों में शिवसेना मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोक रही है। वहीं भाजपा भी आसानी से सीएम पद छोड़ने के मूड में नहीं है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों का सीएम बनाने का फार्मूला दिया है, लेकिन शिवसेना ने इस पर राजी है या नहीं, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पायी है।
हाल ही में महाराष्ट्र कैबिनेट ने शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के स्मारक निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। माना जा रहा था कि इस फैसले के बाद भाजपा और शिवेसना के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल सकती है। बाल ठाकरे का स्मारक मुंबई के मेयर के बंगले में बनाया जाएगा। स्मारक निर्माण के लिए मेयर ने बंगला खाली भी कर दिया है, जिसे एमएमआरडीए को सौंप दिया गया है।

