कांग्रेस पार्टी के संविधान बचाने की मुहिम को जनता को भ्रमित करने का हास्यास्पद प्रयास करार देते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि समय और प्रसंग बदलता है परंतु कांग्रेस पार्टी का जनतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर गांधी परिवार के स्वार्थ को बचाने का प्रयास जारी रहता है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अत्यधिक मजबूत और परिपक्व है और जनता की अदालत में फेल होने के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से इसके खिलाफ किया जा रहा प्रचार सिर्फ एक परिवार की राजनीतिक साख को बचाने का एक झूठा प्रचार है। ‘संविधान बचाओ या परिवार बचाओ’ शीर्षक से अपने ब्लॉग में अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक बार फिर से देश में घृणा और विद्वेष की राजनीति शुरू की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राहुल गांधी जैसी शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं, वह न सिर्फ प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अनादर है बल्कि उनकी खुद की बौखलाहट का परिचायक भी है।

शाह ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा लगातार किया जा रहा मोदी विरोध आज देशविरोध का रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान से निकली हमारी संस्थाओं को आज कांग्रेस के हमलों से बचाए जाने की जरूरत है। कांग्रेस पार्टी ने किसी भी संस्थान को निशाना बनाना नहीं छोड़ा और वह क्षुद्र राजनीतिक फायदे के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और सेना को निशाना बना रही है। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल लगाए जाने और विरोधी दलों के शासन वाले राज्यों में अनुच्छेद 356 लगाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई एक पार्टी है जिसने संविधान की भावना को खत्म किया है, तो वह कांग्रेस है। वह लोकतंत्र का शासन नहीं चाहती बल्कि वंशवाद के शासन को कायम रखना चाहती है। कांग्रेस का ‘संविधान बचाओ’ अभियान लोकतंत्र के शासन पर वंशवाद के शासन को कायम रखने की चाल है। प्रधान न्यायाधीश को हटाने का कांग्रेस का कदम हर उस संस्थान को कमजोर करने की प्रवृत्ति का हिस्सा है जो अपनी वैयक्तिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।

भाजपा अध्यक्ष ने राहुल के भाषण पर कहा कि जिन्हें सेना, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, ईवीएम और रिजर्व बैंक पर विश्वास नहीं है, वे अब कह रहे हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। स्वतंत्र भारत का इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है जिनमें कांग्रेस पार्टी ने एक परिवार के हित के लिए भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार तोड़ा-मरोड़ा है। कांग्रेस का यह गैरजिम्मेदाराना रवैया पुराना है और 1973 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने वरिष्ठता में चौथे नंबर के न्यायमूर्ति को प्रधान न्यायाधीश बना दिया था।

उन्होंने कहा कि ऐसा 1975 में भी हुआ जब इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा खारिज कर देने के बाद जस्टिस एचआर खन्ना को दरकिनार कर गांधी परिवार के प्रति निष्ठा रखने वाले जस्टिस बेग को भारत का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इतिहास गवाह कि कांग्रेस पार्टी ने बार-बार न्यायपालिका को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़ा-मरोड़ा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के बाद देश की दूसरी सबसे पवित्र संस्था सेना के राजनीतिकरण से भी कांग्रेस पार्टी को गुरेज नहीं रहा। उन्होंने इस संबंध में पाकिस्तान पर लक्षित हमले को लेकर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों व भ्रष्टाचार के संबंध में नियंत्रक व महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाने का जिक्र किया। शाह ने कहा कि पिछले चार वर्षो में कांग्रेस पार्टी को लगातार पराजय मिली है जिससे 2014 में 12 राज्यों में शासन करने वाली कांग्रेस सिर्फ चार राज्यों में सिमट गई। ऐसे में ईवीएम पर चयनात्मक प्रश्न उठाने का मकसद सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग को कमजोर करना ही था। उन्होंने कहा कि संविधान ही नहीं, गांधी परिवार की दासता न स्वीकार करने वाले संविधान निर्माताओं को भी कांग्रेस पार्टी ने नहीं बख्शा।