महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी के द्वारा कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने को लेकर जबरदस्त हलचल है। गौरतलब है कि राज्य में बीजेपी, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन वाली महायुति की सरकार है।

इस मामले में शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने बुधवार को पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा, ‘इस सवाल के बारे में बीजेपी के नेताओं से पूछा जाना चाहिए, बीजेपी के नेताओं ने अकोट में एआईएमआईएम के साथ और अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है।’

श्रीकांत शिंदे ने कहा, ‘जिस पार्टी के खिलाफ महायुति हमेशा लड़ती आई है, शिवसेना और बीजेपी लड़ते आए हैं लेकिन सिर्फ सत्ता के लालच में उनके कुछ स्थानीय नेताओं ने इन सभी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है तो यह बहुत गलत है और इस पर वरिष्ठ नेताओं को एक्शन लेना चाहिए।’

पिछले महीने हुए नगर निकाय चुनाव के बाद बीजेपी ने अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को किनारे कर अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ नामक गठबंधन बनाया। इसी तरह, अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में बीजेपी ने एआईएमआईएम और कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन किया है।

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कांग्रेस ने कर दिया पार्टी से निलंबित

इसे लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है, “हमने कांग्रेस के चिन्ह पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं लेकिन राज्य नेतृत्व या राज्य कार्यालय को सूचित किए बिना आपने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया है और इसकी जानकारी हमें मीडिया के सूत्रों से मिली है। यह ठीक नहीं है, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन के निर्देशानुसार आपको पार्टी से निलंबित किया जा रहा है।”

यह अनुशासन के खिलाफ- फड़नवीस

इस मामले के चर्चा में आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि ऐसे गठबंधन को स्वीकार नहीं किया जा सकता और उन्हें तोड़ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि ऐसे गठबंधनों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मंजूरी नहीं दी है और यह अनुशासन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या एआईएमआईएम से कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा और जिन्होंने ऐसा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

फड़नवीस ने एक न्यूज चैनल से कहा, “मैं साफ कहना चाहता हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा। अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी तरफ से ऐसा फैसला लिया है, तो वह अनुशासन के खिलाफ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे गठबंधनों को खत्म करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।

अंबरनाथ में क्या हुआ?

अंबरनाथ में शिवसेना 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई थी। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर 31 सीट का बहुमत हासिल कर लिया। तीनों दलों ने कहा कि यह गठबंधन शहर को बचाने और स्थिर प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। वहीं, शिवसेना ने इस गठबंधन को अनैतिक व मौकापरस्त बताया। भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं। उन्होंने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराया।

60 सदस्यीय नगर परिषद के चुनाव में शिवसेना को 27, भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और एनसीपी को चार सीट पर जीत मिली जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन से तीनों दलों के सदस्यों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े (30) से ज्यादा है।

‘अकोट विकास मंच’ का गठन

अकोट में भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ बनाया जिसमें एआईएमआईएम के अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शिवसेना (एकनाथ शिंदे) , एनसीपी, शरद पवार की एनसीपी (एसपी) और बच्छू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल है। भाजपा ने 35 सदस्यीय परिषद में 11 सीट जीतीं, एआईएमआईएम को दो सीट पर जीत मिली। अन्य पार्टियों के समर्थन से गठबंधन के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

अकोला से भाजपा के सांसद अनूप धोत्रे ने पत्रकारों से कहा, “एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। हमने एआईएमआईएम के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है।”

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भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे- इम्तियाज जलील

एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा, “हमारा राजनीतिक रुख भाजपा के खिलाफ है। मैंने पार्टी के प्रभारी से तुरंत मुझे स्थिति की जानकारी देने को कहा है।” जलील ने कहा कि पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा के किसी गठबंधन में शामिल नहीं होगी।

एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष जलील ने कहा, “ओवैसी अकोट में पार्षदों के निर्णय से नाराज हैं। अगर भाजपा किसी गठबंधन का हिस्सा है, तो हम उसमें शामिल नहीं होंगे।” उन्होंने यह दावा खारिज कर दिया कि एआईएमआईएम पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी है। जलील ने कहा, “मैंने पार्षदों को स्पष्ट कर दिया था कि हम भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे स्थानीय स्तर पर भाजपा के साथ एक सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना चाहते हैं। लेकिन मैंने उन्हें स्पष्ट किया कि विचारधारा को ध्यान में रखते हुए हम भाजपा से हाथ नहीं मिला सकते।”

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