बिहार के अलग-अलग जिलों में जारी सांप्रदायिक तनाव से निपटने में अब तक नाकाम रही नीतीश सरकार की हर तरफ किरकिरी हो रही है। कांग्रेस ने नीतीश कुमार को लाचार बतलाया है तो वही राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार ने बीजेपी को अपना एजेंडा चलाने की छूट दे रखी है। हालांकि अब जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी तोड़ दी है। जेडीयू के नेता श्याम रजक ने एनडीटीवी से बातचीत करते हुए कहा कि ‘नीतीश जी कभी भी कानून व्यवस्था से समझौता नहीं करते हैं।’ राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वो कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं’। जाहिर है राज्य में जारी हिंसा के बीच जेेडीयू ने बीजेपी को कड़ा संदेश देने की कोशिश तो जरूर की है लेकिन राज्य में सांप्रदायिक तनाव को खत्म करना अभी भी एक चुनौती है।

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने गठबंधन साथी भाजपा को नसीहत देते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों को लेकर उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। आपको याद दिला दें कि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शास्वत की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। अर्जित पर भागलुपर में बिना इजाजत जुलूस निकालने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। इस जुलूस के दौरान भागलपुर में भारी हिंसा भी हुई थी। इसके बाद राज्य में रामवनमी (25 मार्च) के दिन से ही अलग-अलग जगहों से हिंसा की लगातार खबरें आ रही हैं। भागलपुर से शुरू हुई हिंसा अब औरंगाबाद, समस्तीपुर और यहां तक की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा तक जा पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक राज्य में जारी हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री बेहद नाखुश हैं।

विपक्ष लगातार इन मुद्दों को लेकर राज्य की सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। विपक्षी नेताओं ने कुछ दिन पहले ही विधानसभा में भी भागलुपर और दूसरे जिलों में हुए सांप्रदायिक हिंसा को मुद्दा बनाकर नीतीश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। इधर पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी रांची से दिल्ली जाते वक्त नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा है। लालू प्रसाद ने कहा है कि राज्य में सांप्रदायिक तनाव हो रहे हैं और नीतीश कुमार इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम हैं।