साल 2013 में हैदराबाद में हुए बम धमाकों में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने यासीन भटकल और तहसीन अख्तर उर्फ मोनू को दोषी करार दिया है। तहसीन अख्तर का बिहार से कनेक्शन है, वह समस्तीपुर के कल्याणपुर का रहने वाला है। प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद तहसीन दरभंगा के पॉलिटेक्निक में पढ़ रहा था और इसी दौरान वह आईएम के संपर्क में आया। फिर देखते ही देखते तहसीन इस संगठन के मास्टरमांइड के रूप में जाना जाने लगा। हैदाराबाद बम धमाकों के अलावा तहसीन का नाम पटना और बोधगया बम धमाकों में भी शामिल है। बताया जा रहा है कि 27 सितंबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान हुए बम धमाके में भी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू का हाथ है।

कोर्ट ने इस मामले में भटकल और तहसीन के अलावा 5 और लोगों को कसूरवार पाया है। हालांकि इनकी सजा का पर फैसला 19 दिसंबर को होगा। ऐसा पहली बार होगा जब आईएम के आतंकियों को सजा सुनाई जाएगी।

एनआईए ने इन बम धमाकों में अपनी जांच के दौरान पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। लेकिन एनआई में मुताबिक रियाज नाम का आतंकी अभी भी फरार है। रियाज की नेपाल या पाकिस्तान में होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं हैदराबाद में हुए बम धमाकों के लिए तो भटकल और तहसीन को सजा मिल जाएगी लेकिन पटना ब्लास्ट के मामले चार्जशीट का इतंजार है।हैदराबाद और पटना धमाकों में 6 महीनों का अतंर था।

बता दें कि हैरादाबाद में 21 फरवरी 2013 को दिससुखनगर इलाके में आतंकियों ने धमाके किए थे। इन धमकों में 18 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 150 लोग घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने यासीन भटकल को नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था और कुछ समय तक तिहाड़ जेल में रखने के बाद एनआईए ने उसे हैदाराबाद की चेरलापल्ली जेल में शिफ्ट कर दिया था। बम बनाने में भटकल माहिर है, मुंबई पुलिस और एनआईए ने भटकल पर 10—10 लाख रूपये इनाम भी रखा था।