मोदी सरकार के शपथग्रहण समारोह के तीन दिन बाद ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में अपने कैबिनेट का विस्तार किया। शपथ ग्रहण समारोह में गवर्नर लालजी टंडन ने 8 नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। नए मंत्रियों में सभी जनता दल यूनाइटेड से है। इसमें एनडीए के सहयोगी दल भाजपा और लोजपा के किसी भी दल के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया है।
नए मंत्रियों में शपथ लेने वालों में श्याम रजक, बीमा भारती, अशोक चौधरी, लक्ष्मेशवर राय, नरेंद्र यादव, राम सेवक कुशवाहा, नीरज सिंह और संजय झा शामिल हैं। इनमें से 4 लोग पहली बार मंत्री बने हैं। नए मंत्रिमंडल विस्तार में 75 फीसदी पिछड़े वर्ग को भागीदरी दी गई है। संजय झा भाजपा से जेडीयू में आए हैं। वहीं नीरज सिंह 2008 से लगातार एमएलसी हैं। बीमा भारती अति पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं।
नए मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ लेने वाले नीरज सिंह ने नीतीश कुमार का भाजपा से बदला लेने के सवाल पर कहा कि सीएम नीतीश कुमार की कार्यशैली जगजाहिर है। उन्होंने कभी इस तरह का व्यवहार नहीं किया है। मंत्रिपरिषद् में किसे शामिल करना है कि यह सीएम का विशेषाधिकार है।
शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी, भाजपा नेता नंद किशोर यादव, आरजेडी के प्रदेशाध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे व अन्य नेता भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे। इससे पहले बिहार सरकार के दो मंत्री दिनेश चंद्र यादव और ललन सिंह सांसद चुने जा चुके हैं। उनका पद भी नीतीश सरकार में खाली है।
केंद्र में शामिल होने से किया था इनकारः इससे पहले नीतीश कुमार ने केंद्र में मोदी 2.0 में शामिल होने से इनकार कर दिया था। नीतीश का कहना था कि वह सांकेतिक रूप से सरकार में शामिल नहीं होना चाहते हैं। उन्होंने आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की थी।
नीतीश ने यह भी साफ किया था इस चुनाव की जीत किसी एक आदमी की जीत नहीं है। केंद्र सरकार में जदयू को एक मंत्री पद देने की पेशकश की गई थी। नीतीश का कहना था शिरोमणि अकाली दल के दो सांसद, एलजेपी के 6 सांसद होने और उनके 16 सांसद होने पर ही बराबर भागीदारी कैसे संभव है।
