बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन हो चुका है और सभी मंत्रियों को विभागों का बंटवारा भी हो गया है। पिछले 20 वर्षों से नीतीश कुमार अपने पास ही गृह मंत्रालय रखे हुए थे लेकिन इस बार उन्होंने गृह मंत्रालय का जिम्मा बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को दिया है।हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि बीजेपी के मंत्री जरूर ज्यादा हैं लेकिन राज्य का सबसे ज्यादा बजट वाला मंत्रालय अब भी जदयू के पास है।

मंत्रिमंडल में संख्या के हिसाब से देखें तो नीतीश सरकार में बीजेपी के खाते से 14 मंत्री हैं, जबकि जदयू की ओर से मुख्यमंत्री को लेकर कुल 9 लोग शामिल हैं। वहीं सहयोगी दलों के 4 मंत्री हैं। हालांकि सबसे ज्यादा बजट वाला शिक्षा विभाग जदयू के पास है। इतना ही नहीं, सालाना बजट के हिसाब से टॉप-5 विभागों को देखें तो इनमें से तीन विभाग जदयू के पास हैं।

जदयू के सुनील, श्रवण और बिजेंद्र

नीतीश कुमार के अगुवाई वाली बिहार सरकार ने साल 2025-26 के लिए करीब 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। कुल बजट का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा विभाग को आवंटित किया गया। सम्बन्धित वित्त वर्ष में बिहार शिक्षा विभाग को करीब 60 हजार करोड़) दिया गया।

सुनील कुमार (जेडीयू) – शिक्षा मंत्री – (60 हजार करोड़): नवनिर्वाचित नीतीश सरकार में मंत्री सुनील कुमार को शिक्षा विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। सुनील के पास शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग है। उनके सभी विभागों के कुल बजट की बात करें तो करीब 62 हजार करोड़ है।

गोपालगंज की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भोरे विधान सभा सीट से विधायक सुनील कुमार दूसरी बार राज्य के शिक्षा मंत्री बने हैं। पूर्व आईपीएस सुनील कुमार साल 2020 में पहली बार भोरे सीट से ही विधायक बने थे। साल 2024 में हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान उनको नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए शिक्षा जैसा बड़ा विभाग सौंपा गया।

2025 में सुनील कुमार दूसरी बार विधायक बने। नई सरकार में भी शिक्षा मंत्रालय सुनील को ही दिया गया है। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी रहे सुनील कुमार ने ताजा चुनाव में सीपीआई एमएल के उम्मीदवार और जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष धनंजय को 16 हजार से अधिक वोटों से हराया।

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मंगल पांडे (बीजेपी) – स्वास्थ्य मंत्री – (20 हजार करोड़): बजट आवंट के अनुसार शिक्षा के बाद अगला नंबर स्वास्थ्य विभाग का आता है। स्वास्थ्य विभाग बीजेपी के खाते में गया है। जिसका जिम्मा सीवान विधानसभा से जीत कर आए मंगल पांडे को दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को 20 हजार करोड़ आवंटित हुए थे। मंगल पांडे के पास स्वास्थ्य के अलावा विधि विभाग भी है। दोनों विभागों का कुल बजट 21 हजार करोड़ है।

सम्राट चौधरी (बीजेपी) – गृह मंत्री – (17 हजार करोड़): बजट के हिसाब से तीसरे नंबर पर मंत्रालय गृह विभाग का है। गृह मंत्रालय का जिम्मा राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। तारापुर विधान सभा सीट से जीतने वाले सम्राट चौधरी बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। गृह विभाग को 17 हजार करोड़ आवंटित हैं।

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श्रवण कुमार (जेडीयू) – ग्रामीण विकास – (16 हजार करोड़): चौथे नंबर पर जेडीयू के श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास का विभाग दिया गया। ग्रामीण विकास को आवंटित राशि 16 हजार करोड़ हैं। नालंदा से विधायक श्रवण के पास ग्रामीण विकास के साथ ही परिवहन विभाग भी है। कुल मिलाकर श्रवण के दोनों विभागों को आवंटित बजट लगभग 16.7 हजार करोड़ है।

बिजेंद्र प्रसाद यादव (जेडीयू) – ऊर्जा – (13 हजार करोड़): वहीं नीतीश सरकार में सबसे उम्र दराज मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर हैं। बिजेंद्र के पास ऊर्जा, वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य कर और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग का जिम्मा है। ऊर्जा विभाग को करीब 13 हजार करोड़ का बजट आवंटित है। जबकि उनको मिले कुल विभागों का बजट देखें तो करीब 19 हजार करोड़ का है। सुपौल विधानसभा से 9वीं बार विधायक बनें बिजेंद्र 79 साल के हैं।

बिहार के कुल तीन लाख 16 हजार करोड़ के पिछले बजट में एक लाख 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बजट इन पाँच मंत्रियों के पास रहेगा। पिछले बजट के हिसाब से देखें तो करीब 40 प्रतिशत बजट इन पाँच मंत्रियों के पास होगा और बाकी 22 मंत्रियों के पास बाकी बजट राशि होगी। अब देखना है कि नई सरकार अपने पहले बजट में इन मंत्रालयों को कितना बजट आवंटित करती है।