बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि वह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। वहीं उन्होंने यूजीसी के नए कानून को लेकर भी विरोध जताया है। अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस ऑफिसर हैं। उनकी तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें वह एक पोस्टर लेकर खड़े हैं।

अलंकार अग्निहोत्री की मांग क्या है?

अलंकार अग्निहोत्री की मांग है कि यूजीसी रोलबैक और काला कानून वापस लिया जाए। इसके अलावा उनके पोस्टर पर यह भी लिखा है कि शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा पूरे प्रदेश में सुर्खियों में चर्चा का विषय बन गया है। बता दें कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके शिष्यों की पिटाई की है और उनकी चोटी तक खींची है।

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वह इस घटना से बेहद आहत हैं। उन्होंने एक लेटर जारी किया है जिसमें कहा है कि आप लोग ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं, जिससे पूरा समाज बंट जाएगा। अलंकार अभिनेत्री ने कहा कि आज सवर्ण विधायक और सांसद एक कॉरपोरेट कर्मचारियों के तौर पर काम कर रहे हैं और उनके पास रीढ़ भी नहीं है कि कुछ बोल सके।

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अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी- अलंकार

अलंकार अभिनेत्री ने कहा कि अगर उनके अंदर थोड़ी सी भी हिम्मत है तो उन्हें यूजीसी के नियमों के खिलाफ बोलना चाहिए। शंकराचार्य विवाद को लेकर भी उन्होंने कहा कि उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी की की गई है। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि दोनों घटनाएं केवल प्रशासनिक या शैक्षिक निर्णय ही नहीं बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की गरिमा और अधिकारों से जुड़ी हुई है।

यूजीसी को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अगर स्वर्ण समाज के नेता, विधायक, सांसद समाज के साथ नहीं खड़े होते तो भविष्य में उनकी चुनावी संभावनाएं भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि यह समय सामान्य वर्ग के लिए निर्णायक है और उन्हें सत्ता या सरकार के साथ नहीं बल्कि जनता और समाज के साथ खड़ा होना चाहिए।