सपा सरकार में मुख्यमंत्री तक के फैसले पलट देने की हैसियत रखने वाले आजम खां पर मौजूदा सरकार की टेढ़ी नजर कहर ढा रही है। मंगलवार को उन्हें 87 वें मामले में भी जमानत मिल गई लेकिन तभी सामने आ गया 88वां केस और आजम खान जेल से बाहर आते आते रह गए। फिलहाल इस नए मामले की सुनवाई होने तक उन्हें जेल की सींखचों के पीछे रहना पड़ेगा।
दरअसल, मार्च 2020 में एक शिकायत दर्ज कराई गई ती, जिसमें आजम खान पर आरोप था कि उन्होंने रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता हासिल करने के लिए जाली दस्तावेज दिए थे। स्कूल 2015 में बना था। ब्लॉक एजुकेशन अफसर ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। लेकिन आजम के सितारे गर्दिश में हैं तो उनका नाम सामने आना लाजिमी ही था। आजम के वकील सफदर काजमी के अनुसार पिछले हफ्ते एक और मामला दर्ज होने के कारण वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
वैसे आज आजम खान को बड़ी राहत मिली है। उनको इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। वक्फ बोर्ड की जमीन मामले में पांच मई को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने आज फैसला सुनाया। कोर्ट ने पांच मई को आजम खान की ओर से एडवोकेट इमरान उल्लाह और सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर निर्णय सुरक्षित किया था।
शत्रु संपत्ति पर कब्जे के मामले में राहत न मिलने पर बीते सप्ताह आजम खान के वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट पर कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि 87 मे से 86 मामलों में आजम खान को जमानत मिल चुकी है तो एक मामले के लिए इतना लंबा वक्त क्यों लग रहा है। कोर्ट ने कहा कि 137 दिन बाद भी फैसला क्यों नहीं हो पाया। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार लगाई।
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी आर गवई की बेंच ने कहा कि ये न्याय का माखौल है। कोर्ट ने कहा कि अगर इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले में फैसला नहीं देगा तो हम इसमें दखल देंगे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 11 मई को अगली सुनवाई करने वाला था लेकिन उससे पहले ही हाईकोर्ट ने फैसला कर आजम खान को जमानत दे दी। आजम खान फिलहाल सीतापुर जेल में बंद हैं।
