लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को करारा झटका लगा। समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसके बाद माना गया की कुर्मी समाज ने बीजेपी को कम वोट दिया। उसके बाद से ही भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। बीते कुछ हफ्तों से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और फैजाबाद से पूर्व सांसद विनय कटियार चर्चा में हैं। पिछले कुछ हफ़्तों में विनय कटियार ने अपने घर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में संघ परिवार के ऐसे सदस्य भी शामिल थे, जिन्होंने बाबरी मस्जिद गिराए जाने से पहले और बाद में राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका निभाई थी और 1990 के दशक में पुलिस कार्रवाई का सामना किया था।

बजरंग दल के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं कटियार

विनय कटियार 71 साल के हैं और बजरंग दल के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। विनय कटियार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक थे। विनय कटियार तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा में बीजेपी सांसद भी रह चुके हैं। हालांकि, पिछले कई सालों से तेज़तर्रार नेता के रूप में विख्यात विनय कटियार राजनीतिक रूप से हाशिए पर चले गए थे।

पिछले महीने से अयोध्या के रामकोट में विनय कटियार के घर में गतिविधियां बढ़ी हैं। उनके घर का नाम ‘हिंदू धाम’ है। यह सब तब शुरू हुआ जब नए चुने गए उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 22 दिसंबर को पार्टी का कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद लखनऊ में विनय कटियार के घर जाकर उनसे मुलाकात की। विनय कटियार की तरह पंकज चौधरी भी कुर्मी समुदाय (ओबीसी) से आते हैं।

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पंकज चौधरी ने विनय कटियार से की मुलाकात

पंकज चौधरी ने विनय कटियार के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय तक बंद कमरे में बैठक की। बाद में विनय कटियार ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक पंकज चौधरी की उन कुर्मी पार्टी नेताओं को सक्रिय करने की कोशिशों का हिस्सा थी जो अभी सक्रिय नहीं हैं। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हो सकता है कि पंकज चौधरी से विनय कटियार को अपनी राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने और अपने समर्थकों से जुड़ने का संकेत मिला हो।” 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत में पंकज चौधरी, विनय कटियार के करीबी माने जाते थे। तब विनय कटियार यूपी से बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक थे।

लक्ष्मीकांत बाजपेयी से भी मिले कटियार

पिछले कुछ सालों से विनय कटियार ज़्यादातर लखनऊ वाले घर में रहते थे। लेकिन, उनके कुछ करीबी सहयोगियों ने बताया कि पिछले दो हफ़्तों से उन्होंने अपना ठिकाना पूरी तरह से अयोध्या शहर में अपने घर पर बना लिया है। पिछले मंगलवार को राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी स्थानीय नेताओं के साथ विनय कटियार से उनके अयोध्या वाले घर पर मिलने गए। लक्ष्मीकांत बाजपेयी भी लंबे समय तक बड़ी जिम्मेदारी से दूर थे लेकिन अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा है। इस मीटिंग के बाद विनय कटियार ने लोकल मीडिया को बताया कि वह 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ेंगे।

विनय कटियार ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए भी यही बात दोहराई और कहा, “हां, मैं आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर अयोध्या से चुनाव लड़ूंगा।” यह विधानसभा चुनाव में उनका पहला चुनाव होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस बारे में बीजेपी लीडरशिप से बात की है, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्हें करना है।

दिलचस्प बात यह है कि अयोध्या विधानसभा सीट पर अभी बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता विधायक हैं, जिन्होंने 2017 में भी पार्टी के टिकट पर यह सीट जीती थी। अयोध्या के एक बीजेपी नेता ने कहा कि विनय कटियार पिछले 7-8 सालों से बीजेपी, बजरंग दल और VHP में अपने समर्थकों से नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा, “इस दौरान उन्होंने इन संगठनों या राम मंदिर ट्रस्ट में जाना भी बंद कर दिया था और राम मंदिर निर्माण स्थल के आसपास भी नहीं दिखे।”

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राम मंदिर का जनवरी 2024 में अभिषेक हुआ था और अब पूरा हो गया है। बीजेपी नेता ने कहा कि विनय कटियार के लिए चीजें बदली हुई लग रही हैं क्योंकि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने से एक दिन पहले खुद अपने समर्थकों को मीटिंग के लिए मैसेज भेजा था। उन्होंने कहा, “विनय कटियार ने चाय-नाश्ते पर उनके साथ एक्टिव पॉलिटिक्स में अपनी वापसी के बारे में बात की।”

5 बार सांसद रह चुके हैं कटियार

विनय कटियार राम मंदिर आंदोलन के सबसे आक्रामक चेहरों में से एक थे। वह बजरंग दल के संस्थापक प्रमुख थे। उन्हें 2002 में यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था। साथ ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। विनय कटियार ने फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से लगातार तीन बार (1991, 1996 और 1999 में) जीत हासिल की। विनय कटियार ने 2006 में रायबरेली से लोकसभा उपचुनाव भी लड़ा था, लेकिन सोनिया गांधी से हार गए थे। विनय कटियार 2006 से दो बार राज्यसभा सांसद भी रहे।

मस्जिद को लेकर कटियार ने दिया था विवादित बयान

पिछले साल सितंबर में विनय कटियार के इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था कि अयोध्या में कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी और मुसलमानों को अयोध्या छोड़कर यूपी में सरयू नदी के पार दूसरे जिलों में चले जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने तब उनकी आलोचना करते हुए कहा था कि देश सभी धर्मों के लोगों का है। अवधेश प्रसाद ने कहा था, “विनय कटियार बीजेपी के सीनियर नेता हैं, लेकिन मोदी सरकार में उन्हें किनारे किया जा रहा है और नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने निराशा और हताशा में ये टिप्पणियां की हैं।”

PDA की काट भी साबित हो सकते हैं विनय कटियार

आने वाले समय में बीजेपी के लिए विनय कटिहार राजनीतिक रूप से एकदम फिट भी बैठ सकते हैं। दरअसल कटियार फायरब्रांड नेता और बड़े कुर्मी चेहरा हैं। वह समाजवादी पार्टी के PDA की काट भी साबित हो सकते हैं। दरअसल कुर्मी समाज बीजेपी से थोड़ा दूर हुआ, इसी वजह से पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को बनाया। वहीं विनय कुमार की सक्रियता पार्टी को उस समाज में और मजबूत करेगी। विनय कटियार अवध से आते हैं और उससे सटा हुआ ही पूर्वांचल है, जहां पर काफी अच्छी खासी कुर्मी आबादी है। बीजेपी को 2022 में भी पूर्वांचल में झटका लगा था और 2024 में तो उसे काफी करारा झटका लगा।