बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए लगभग चार महीने का समय हो चुका है। अब सरकार के सभी कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ले ली है। अगर सीएम नीतीश कुमार के कैबिनेट में शामिल हुए मंत्रियों का विश्लेषण किया जाए, तो सामने आता है कि कुल 17 में से 10 नेता पहली बार मंत्री बने हैं। यानी कैबिनेट में 60 फीसदी मंत्री नए हैं। इसकी एक अहम वजह जदयू के अधिकतर कद्दावर नेताओं का हारना, जबकि भाजपा का विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना है। बता दें कि इससे पहले 16 नवंबर को सरकार गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी।

किस पार्टी के कितने नए नेता?: जदयू ने इस कैबिनेट में आठ शपथ लेने वालों में से चार पुराने चेहरों को शामिल किया है। इनमें संजय कुमार झा (जल संसाधन, पीआरडी), श्रवण कुमार (ग्रामीण विकास), लेसी सिंह (खाद्य उपभोक्ता संरक्षण) और मदन सहनी (समाज कल्याण) हैं। दूसरी तरफ चार नए चेहरों में सुमित सिंह (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), सुनील कुमार (मद्य निषेध,उत्पाद, निबंधन), जयंत राज (ग्रामीण कार्य) और मोहम्मद जमा खान (अल्पसंख्यक कल्याण) शामिल हैं।

भाजपा के जिन 9 विधायकों ने शपथ ली, उनमें तीन नेता पुराने चेहरे हैं। इनमें शाहनवाज हुसैन (उद्योग विभाग), सम्राट चौधरी (पंचायती राज) और प्रमोद कुमार (गन्ना उद्योग और विधि) का नाम है। नए नेताओं में नितिन नवीन (पथ निर्माण), नीरज कुमार सिंह (पर्यावरण, वन), सुभाष सिंह (सहकारिता), आलोक रंजन (कला संस्कृति और युवा), जनक राम (खान और भूतत्व) और नारायण प्रसाद (पर्यटन) शामिल हैं।

विश्लेषण

शिक्षा के आधार पर: भाजपा के दो नेता सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। यह नेता हैं आलोक रंजन और रामप्रीत पासवान। वहीं, सबसे कम पढ़े-लिखे नेताओं में भी भाजपा के नारायण प्रसाद और विजेंद्र प्रसाद यादव शामिल हैं। दोनों ने ही मैट्रिक तक की पढ़ाई की है, जबकि वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी ने मैट्रिक भी नहीं किया है।

दूसरी तरफ भाजपा के सम्राट चौधरी डिलिट कर चुके हैं, जबकि मंत्रिमंडल के सबसे अहम नेता माने जा रहे भाजपा के शाहनवाज हुसैन की पढ़ाई सिर्फ आईटीआई तक ही हुई है। कैबिनेट में शामिल जदयू के सबसे पढ़े-लिखे नेताओं की बात करें, तो सुनील कुमार और संजय कुमार झा दोनों पोस्ट ग्रैजुएट हैं।

जातिगत आधार पर: गौरतलब है कि इस वक्त भाजपा कोटे से सरकार में 16 मंत्री हैं, जबकि जदयू कोटे से 13। दोनों ही पार्टियों ने इस बार जातिगत समीकरण भी खूब संभाला है। भाजपा और जदयू ने सर्वाधिक 5-5 राजपूत और दलित मंत्रियों को मौका दिया है। इसके अलावा तीन ब्राह्मणों और वैश्यों को पद सौंपे गए हैं। दूसरी तरफ कुर्मियों, भूमिहार, यादव और कुशवाहा वर्ग के दो-दो नेतां को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा अति-पिछड़ा 4, मुस्लिम 2, और एक कायस्थ मंत्री हैं।

आपराधिक मामलों में: अगर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले वाले नेताओं की बात की जाए, तो भाजपा के तीन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा केस दर्ज हैं। इनमें गोपालगंज से जीतकर आए सुभाष सिंह पर छह केस, बाकीपुर से जीतकर आए नितिन नवीन पर 5 और जाले के विधायक जिवेश कुमार पर भी 5 ही मामले दर्ज हैं। इसके अलावा वीआईपी की ओर से मंत्री पद पाने वाले मुकेश सहनी पर पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इन पांच को विरासत में मिली राजनीति: नीतीश मंत्रिमंडल में इस बार पांच मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है। इनमें सम्राट चौधरी हैं, जिनके पिता शकुनी चौधरी लालू-राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रहे थे। दूसरी तरफ जयंत राज के पिता जदयू विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा सुमित कुमार के पिता नरेंद्र सिंह भी नीतीश कैबिनेट में कृषि मंत्री थे। नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा भी पटना पश्चिम से विधायक रह चुके हैं। सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन का है, जिन्हें कैबिनेट में जगह मिली।