दिल्ली में दो बार अपनी सरकार बनाने के बाद भी आम आदमी पार्टी डीयू की राजनीति में एंट्री करने में असफल रही है। 2012 के बाद से दिल्ली में सक्रिय आप अभी भी देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय की राजनीति में घुसने के लिए जद्दोजहद कर रही है। कांग्रेस से जुड़े शिक्षकों का एक समूह पिछले हफ्ते आप में शामिल हो गया है, इसके बाद भी कोई फर्क देखने को नहीं मिल रहा है।
पिछले साल आप के शिक्षक निकाय ने दिल्ली शिक्षक संघ के लिए पहली बार चुनाव लड़ा था। इन चुनावों में आप कोई सीट नहीं जीत सकी थी। चुनाव के नतीजों को लेकर इसके पदाधिकारियों ने हार के लिए आप सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
पिछले कई सालों से डीयू के 12 कॉलेजों में शिक्षकों के वेतन वितरण के मुद्दे को लेकर आप और कॉलेज प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया कई मौकों पर कॉलेजों के खातों को ठीक से बनाए रखने में विफल रहने, इसके द्वारा नामित शासी निकाय के सदस्यों की नियुक्ति नहीं करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। वहीं, कॉलेजों ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है और राज्य सरकार पर कॉलेजों के प्रशासन को रणनीति के तहत नियंत्रित करने का आरोप लगाया है।
आप की तरफ से शिक्षक निकाय के उम्मीदवार हंसराज सुमन ने DUTA (दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) चुनावों में पार्टी की हार के लिए कॉलेजों और राज्य सरकार के बीच चल रहे विवाद को जिम्मेदार ठहराया था।
पिछले हफ्ते, एकेडमिक्स फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट के सदस्य सिसोदिया की उपस्थिति में आप में शामिल हो गए। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस समूह का प्रभाव कम हो गया है। DUTA की लड़ाई अब वाम-संबद्ध डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट और RSS से जुड़े नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के बीच ही रह गई है। वहीं, आप के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन्हें अभी भी शिक्षक चुनावों में स्वीकृति मिल सकती है, लेकिन वो तभी संभव है जब एक ऐसी टीम तैयार हो जो जिसे विश्वविद्यालय की राजनीति की समझ हो।
इसके अलावा 12 कॉलेजों और दिल्ली सरकार के बीच आए दिन फंड को लेकर चलते विवाद के कारण आप की यूनिवर्सिटी की राजनीति में एंट्री की राह मुश्किल है। पार्टी का एक वर्ग मानता है कि जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता, तब तक आप को चुनाव से दूर रहना चाहिए।
हालांकि, कई लोगों को लगता है कि डीयू का मौजूदा राजनीतिक माहौल आप के लिए एकदम सही है। वाम और आरएसएस से जुड़े शिक्षक निकायों के बारे में बोलते हुए, एक नेता ने कहा, “वे कम से कम सात सालों से डीयू में मुख्य खिलाड़ी रहे हैं। आप एक ऐसी पार्टी है जो ऐसे माहौल में फलती-फूलती है जहां लोग तीसरे विकल्प की तलाश में हैं। हमारा मानना है कि यह समय शिक्षकों को यह दिखाने का है कि हम उनके लाभ के लिए काम करेंगे।”
