मोहम्मद महताब आलम को 2018 में नौकरी देने के नाम पर 999 रुपये का धोखा दिया गया था। लेकिन अब वही मोहम्मद महताब आलम खुद एक बड़ा फर्जीवाड़ा कर रहा है। इसी मामले में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बड़ी बात यह है कि जिस स्कैम में वो फंसा था, अब खुद उसी तरह का धोखा वो दूसरों के साथ कर रहा है।

असल में 2018 में आलम नौकरी के नाम पर ठगे जाने के बाद पुलिस के पास शिकायत लेकर गया था। लेकिन उसकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और वह 999 रुपये गंवा बैठा। अब, सालों बाद आलम खुद गिरफ्तार हुआ है। साउथ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने उसे और उसके तीन साथियों को पकड़ा है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से करीब 3 करोड़ रुपये तक वसूले हैं।

डीसीपी साउथ-ईस्ट, डॉ. हेमंत तिवारी के अनुसार, इन लोगों ने नौकरी के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी की है। वे कहते हैं, “हमने अब तक लगभग 300 पीड़ितों की पहचान की है। करीब 3 करोड़ रुपये की ट्रांजैक्शन दिखाई दे रही है, लेकिन आंकड़ा और बढ़ सकता है। जांच में हमने 16 बैंक खातों की पहचान की है। साथ ही 23 डेबिट कार्ड, एक हार्ड डिस्क, 18 लैपटॉप और 20 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।”

इस मामले में आलम के अलावा 35 वर्षीय संदीप सिंह, छत्तीसगढ़ निवासी संजीव चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया है। दो अन्य आरोपियों की पहचान हर्षिता और शिवम रोहिल्ला के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, आलम ने लोगों को ठगने का काम 2019 में ही शुरू कर दिया था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह फर्जी जॉब रैकेट चला रहा था। यह रैकेट तब खुला जब शाहीन बाग के एक शख्स ने शिकायत की कि उससे नौकरी देने के नाम पर 13,500 रुपये ठगे गए। जिस खाते में उसने पैसे डाले थे, उसकी जांच से खाते के असली धारक की जानकारी मिली। अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर से पुलिस हर्षिता तक पहुंची।

पूछताछ में हर्षिता ने बताया कि खाता और सिम उसके नाम पर हैं, लेकिन उसने बाद में यह सब संजीव को दे दिया था। उसके कॉल रिकॉर्ड खंगालने पर शिवम नाम का शख्स भी सामने आया जिसे अमर कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में पता चला कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड मोहम्मद महताब आलम ही है जो मयूर विहार फेस-3 से यह रैकेट चला रहा था।

डीसीपी के अनुसार जब्त की गए सभी डिजिटल डिवाइस, बैंक स्टेटमेंट, यूपीआई लेन-देन और सीसीटीवी फुटेज का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि आलम ने शुरुआत में लोगों से मात्र 2,000 रुपये तक ठगना शुरू किया था, लेकिन समय के साथ उसका नेटवर्क बढ़ता गया और रैकेट बड़े स्तर पर फैल गया। आलम जानता था कि उसका लालच एक दिन उसे मुश्किल में डाल देगा, फिर भी वह लोगों को लगातार धोखा देता रहा।

ये भी पढ़ें- कमरे में खेल रही 8 साल की बच्ची से रेप